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ट्रंप के करीबी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन, भारत पर 500% टैरिफ लगाने की करते थे मांग

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का 71 वर्ष की आयु में निधन, भारत पर 500% टैरिफ प्रस्ताव को लेकर भी थे सुर्खियों में

वॉशिंगटन डी.सी., अमेरिका

अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का शनिवार शाम अचानक हुई संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके कार्यालय ने रविवार को जारी आधिकारिक बयान में उनके निधन की पुष्टि की। बयान में कहा गया कि ग्राहम के परिवार ने लोगों से प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद दिया है और इस कठिन समय में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की है।

71 वर्षीय ग्राहम दक्षिण कैरोलिना से लंबे समय तक अमेरिकी सीनेट का प्रतिनिधित्व करते रहे। वे रिपब्लिकन पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे और विदेश नीति, रक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। वर्ष 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की थी, लेकिन बाद में दोनों के बीच राजनीतिक संबंध मजबूत हुए और ग्राहम ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए।

हाल के दिनों में लिंडसे ग्राहम एक प्रस्तावित विधेयक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में थे। इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाना था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित बिल में भारत सहित ऐसे देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल था। हालांकि यह विधेयक अभी केवल प्रस्तावित चरण में था और अमेरिकी कांग्रेस की विधायी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।

लिंडसे ग्राहम पहली बार वर्ष 2002 में अमेरिकी सीनेट के लिए निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने 2008, 2014 और 2020 के चुनावों में लगातार जीत दर्ज की। दो दशकों से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने न्यायपालिका, बजट, रक्षा और विदेश संबंधों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण समितियों में जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें अमेरिका की विदेश नीति के प्रमुख रणनीतिकारों में भी गिना जाता था।

ग्राहम के निधन के बाद अमेरिका और दुनिया के कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित अनेक नेताओं ने उन्हें समर्पित जनप्रतिनिधि, स्पष्टवादी नेता और राष्ट्रीय हितों के लिए प्रतिबद्ध राजनेता बताया। उनके निधन से अमेरिकी राजनीति, विशेषकर रिपब्लिकन पार्टी और सीनेट में एक महत्वपूर्ण रिक्तता पैदा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके निधन के बाद रूस पर प्रतिबंध और प्रस्तावित टैरिफ जैसे मुद्दों पर अमेरिकी कांग्रेस की आगे की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।

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