सना, यमन
यमन में हूती विद्रोहियों के तेजी से बढ़ते सैन्य अभियान ने लाल सागर के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने के बाद बाब-अल-मंदेब के बीच स्थित पेरिम द्वीप पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया है।
पेरिम द्वीप की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। यह ज्वालामुखीय द्वीप बाब-अल-मंदेब के संकरे हिस्से के बीच स्थित है और समुद्री मार्ग को दो चैनलों में विभाजित करता है। इसलिए इस द्वीप पर किसी सैन्य शक्ति का नियंत्रण जहाजों की आवाजाही पर रणनीतिक दबाव पैदा कर सकता है।
मोखा पर कब्जा भी हूतियों के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। यह शहर लाल सागर के पश्चिमी तट पर स्थित है और बाब-अल-मंदेब से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके कब्जे से हूतियों की पश्चिमी तट पर पकड़ मजबूत हुई है और उन्हें बाब-अल-मंदेब की दिशा में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण आधार मिला है।
बाब-अल-मंदेब को वैश्विक व्यापार का अहम समुद्री गलियारा माना जाता है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के जरिए एशिया तथा यूरोप के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस घटनाक्रम का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से जारी व्यवधान के कारण खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति दबाव में है। सऊदी अरब ने भी होर्मुज के जोखिम से बचने के लिए लाल सागर के रास्ते अपने तेल निर्यात को बढ़ाया है। ऐसे में बाब-अल-मंदेब भी प्रभावित हुआ तो वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
हूतियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच संघर्ष तेज होने से 2022 में बने संघर्षविराम के भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि लड़ाई और बढ़ती है तो इसका असर केवल यमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, तेल कीमतों और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।












