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‘ईरान के हमलों से अमेरिका को पहुंचा भारी नुकसान’, पेंटागन वॉचडॉग की रिपोर्ट में बड़ा दावा

नई दिल्ली:
ईरान के साथ संघर्ष के दौरान मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और राजनयिक परिसरों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है। पेंटागन के महानिरीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमलों में अमेरिकी सैन्य ढांचे और राजनयिक परिसरों को व्यापक क्षति हुई, जबकि राजनयिक परिसरों को हुए नुकसान का अनुमान करीब 18.4 करोड़ डॉलर लगाया गया है।

पेंटागन वॉचडॉग ने 28 फरवरी से 30 जून तक की अवधि के लिए तैयार की गई रिपोर्ट में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और संसाधनों पर हुए हमलों का विस्तृत विवरण दिया है।

कई देशों में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान

रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों में कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचा। सैकड़ों इमारतों और अन्य सैन्य संरचनाओं के क्षतिग्रस्त या नष्ट होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

हमलों के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड को अपने कर्मियों, सैन्य उपकरणों और भंडारण सुविधाओं को दूसरी जगहों पर स्थानांतरित करना पड़ा। इसके कारण इराक और कुवैत से सेना के मेडिकल हेलीकॉप्टरों को भी वापस बुलाना पड़ा और कुछ घायल कर्मियों को जमीनी मार्ग से स्थानीय अस्पतालों तक पहुंचाना पड़ा।

बहरीन में हमले से अमेरिकी लॉजिस्टिक्स प्रभावित

रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के क्षेत्रीय केंद्र को हुए नुकसान का असर अमेरिकी सैन्य लॉजिस्टिक्स और संचालन पर पड़ा। इस केंद्र को हुए नुकसान के कारण नई सुविधाएं स्थापित करने और सैन्य गतिविधियों को जारी रखने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

बहरीन की सुविधाओं पर दबाव बढ़ने के बाद हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया को समुद्री लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी सेना का आपूर्ति चक्र करीब 14 से 18 दिन तक लंबा हो गया।

आपूर्ति व्यवस्था में इस बदलाव और सैन्य मेल प्रणाली में आई बाधाओं का असर फारस की खाड़ी में तैनात अमेरिकी सैनिकों और नाविकों पर भी पड़ा।

राजनयिक परिसरों को 18.4 करोड़ डॉलर का नुकसान

अमेरिकी विदेश विभाग और यूएसएआईडी के महानिरीक्षक कार्यालयों के सहयोग से तैयार रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि ईरानी हमलों से मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी राजनयिक परिसरों को करीब 18.4 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च की शुरुआत में दो ईरानी ड्रोनों ने रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर को निशाना बनाया। हमले में परिसर को व्यापक नुकसान पहुंचा और सीआईए स्टेशन भी प्रभावित हुआ।

दुबई में हुए एक ड्रोन हमले में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की एक इमारत को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। वहीं, कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले के बाद वहां का कामकाज कई महीनों तक प्रभावित रहा।

इराक में 600 से ज्यादा हमले

इराक में अमेरिकी ठिकानों पर भी बड़ी संख्या में हमले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, वहां अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को 600 से अधिक हमलों का सामना करना पड़ा।

इन हमलों से अकेले इराक में करीब 15.7 करोड़ डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। इससे अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे और संचालन पर संघर्ष के व्यापक प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हजारों राजनयिक कर्मचारी हुए विस्थापित

लगातार हमलों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण बड़ी संख्या में अमेरिकी राजनयिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को क्षेत्र से बाहर जाना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, 23 फरवरी से 30 जून के बीच करीब 3,500 राजनयिक कर्मचारी इस क्षेत्र से बाहर रहे। बहरीन, इराक, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब और यूएई में तैनात गैर-आपातकालीन कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, स्थिति में कुछ सुधार के बाद अब कुछ राजनयिकों और उनके परिवारों की वापसी शुरू हो गई है और कई स्थानों पर सीमित स्तर पर कामकाज फिर से शुरू किया गया है।

क्या मध्य पूर्व में घटेगी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी?

यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारी मध्य पूर्व में भविष्य की अमेरिकी तैनाती की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि संघर्ष के दौरान अमेरिकी सैन्य और राजनयिक ढांचे को हुए भारी नुकसान के बाद क्या क्षेत्र में अमेरिकी कर्मियों और सैन्य संसाधनों की संख्या को स्थायी रूप से कम किया जाएगा।

रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि ईरानी हमलों का असर केवल तत्काल सैन्य नुकसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अमेरिका की लॉजिस्टिक्स, चिकित्सा सहायता, राजनयिक संचालन और क्षेत्रीय सैन्य तैनाती को भी प्रभावित किया।

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