नई दिल्ली, भारत
अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों से आयात की जाने वाली दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं और उनके जरूरी इंग्रीडिएंट्स पर ‘एड वैलोरम' टैरिफ हटाने का फैसला किया है। इस कदम से संबंधित दवाओं और औषधीय सामग्री के अमेरिका में आयात पर शुल्क का बोझ कम होगा।
अमेरिकी सरकार की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, योग्य उत्पादों पर 0 प्रतिशत एड वैलोरम टैरिफ लागू किया जा सकता है। यह छूट उन देशों से संबंधित है, जिनके साथ अमेरिका के मौजूदा या भविष्य के व्यापार और सुरक्षा ढांचे के तहत समझौते हैं।
भारत समेत इन देशों को राहत
भारत के अलावा जिन देशों को इस व्यवस्था में शामिल किया गया है, उनमें अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।
इस फैसले का खास महत्व दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और उनके सक्रिय या जरूरी घटकों के लिए है। ऐसे उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला कई देशों पर निर्भर करती है। टैरिफ में राहत मिलने से अमेरिका में इन उत्पादों के आयात की लागत कम होने की संभावना है।
क्या होता है ‘एड वैलोरम' टैरिफ?
‘एड वैलोरम' एक ऐसा सीमा शुल्क है, जो किसी आयातित वस्तु की मौद्रिक कीमत के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है। यानी किसी उत्पाद की कीमत जितनी अधिक होगी, उसी अनुपात में उस पर लगने वाला शुल्क भी बढ़ सकता है।
ऐसे में एड वैलोरम टैरिफ को हटाने या शून्य करने से पात्र आयातित उत्पादों की लागत पर सीधा असर पड़ता है।
व्यापार समझौतों के तहत मिलेगी छूट
अमेरिकी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित देशों से आने वाले योग्य उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ की व्यवस्था लागू हो सकती है। इसके पीछे अमेरिका के साथ मौजूद या भविष्य में होने वाले ट्रेड और सिक्योरिटी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को आधार बनाया गया है।
भारत के लिए यह फैसला खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि भारतीय दवा उद्योग अमेरिकी बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, यह राहत सभी दवाओं पर सामान्य रूप से लागू नहीं होगी, बल्कि नोटिस में निर्धारित पात्र उत्पादों और शर्तों के अनुसार ही इसका लाभ मिलेगा।
दुर्लभ बीमारियों की दवाओं के लिए राहत
दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं अक्सर विशेष और सीमित मात्रा में तैयार की जाती हैं। ऐसे उत्पादों की कीमत और आपूर्ति दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे होते हैं। टैरिफ में छूट से संबंधित दवाओं और इंग्रीडिएंट्स के आयात पर लागत का दबाव कम हो सकता है।
फिलहाल अमेरिका के इस फैसले से भारत समेत शामिल देशों से आने वाले पात्र औषधीय उत्पादों के लिए व्यापारिक परिस्थितियां आसान होने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित उत्पाद की पात्रता और अमेरिकी आयात नियमों के तहत लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।











