वाशिंगटन, अमेरिका
अमेरिका में अगले साल टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों के लिए नियमों में बदलाव की तैयारी की जा रही है। ट्रंप प्रशासन टैक्स फॉर्म में करदाताओं से उनकी नागरिकता और अमेरिका में काम करने के कानूनी अधिकार से जुड़ी जानकारी मांगने की योजना बना रहा है। प्रस्तावित बदलाव को लेकर प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) के फार्म-1040 के मसौदे में एक नया खंड जोड़ने की तैयारी है। इसमें करदाताओं से यह बताने को कहा जाएगा कि वे अमेरिकी नागरिक, अमेरिकी नेशनल या अमेरिका में कानूनी रूप से काम करने के लिए अधिकृत विदेशी नागरिक हैं।
करदाता और जीवनसाथी को देना होगा जवाब
प्रस्तावित फॉर्म में करदाताओं से इस संबंध में ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब मांगा जाएगा। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी के साथ संयुक्त रूप से टैक्स रिटर्न दाखिल करता है, तो उसके जीवनसाथी से भी यही जानकारी मांगी जा सकती है।
प्रशासन इस बदलाव को उन लोगों को संघीय टैक्स लाभ से दूर रखने की व्यापक कोशिश का हिस्सा मान रहा है, जिनका अमेरिका में कानूनी दर्जा स्पष्ट या स्थायी नहीं है।
हालांकि, टैक्स और आव्रजन मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि कई टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के लिए पहले से ही वैध सोशल सिक्योरिटी नंबर की आवश्यकता होती है। ऐसे में नए सवाल का वास्तविक व्यावहारिक प्रभाव सीमित हो सकता है।
प्रवासियों में बढ़ सकता है डर
विशेषज्ञों के मुताबिक, नए प्रावधान का सबसे बड़ा असर प्रवासियों की चिंता के रूप में सामने आ सकता है। कुछ लोगों को आशंका हो सकती है कि टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय दी गई उनकी व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल आव्रजन संबंधी कार्रवाई में किया जा सकता है।
आईआरएस की पूर्व अधिकारी और सेंटर फॉर टैक्सपेयर राइट्स की कार्यकारी निदेशक नीना ओल्सन ने कहा है कि टैक्स कानून लागू करने के लिए आईआरएस को इस जानकारी की आवश्यकता नहीं है। उनके संगठन ने पहले डाटा साझा किए जाने से जुड़े मामले में आईआरएस के खिलाफ मुकदमा भी किया था।
कुछ प्रवासियों पर पड़ सकता है असर
इस बीच ट्रेजरी विभाग कानूनी दर्जे वाले कुछ प्रवासियों के लिए भी टैक्स क्रेडिट की पात्रता से जुड़े नियमों को सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों का असर डीएसीए के तहत संरक्षण पाने वाले लोगों और कामकाजी वीजा पर अमेरिका में रह रहे प्रवासियों पर भी पड़ सकता है।
टैक्स तैयार करने वाले विशेषज्ञों और वकीलों का कहना है कि नए नियमों के कारण अगले साल लाखों करदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं प्रशासन का कहना है कि बदलावों का उद्देश्य ऐसे लोगों को टैक्स लाभ लेने से रोकना है, जो उसके लिए पात्र नहीं हैं।
फिलहाल प्रस्तावित बदलावों को लेकर चर्चा जारी है और अगले साल टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं पर इसके वास्तविक प्रभाव को नियमों के अंतिम रूप के बाद ही स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।











