नई दिल्ली, दिल्ली
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस फैसले को वर्ष 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि योजना से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ देश का बिजली ग्रिड भी मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III के तहत 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसारण और एकीकरण के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके अलावा 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना है।
इस योजना का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली को प्रभावी ढंग से ग्रिड से जोड़ना और उसका प्रसारण सुनिश्चित करना है। सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में उतार-चढ़ाव को देखते हुए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की कुल लागत 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी। इसमें करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये राज्यों के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने पर खर्च किए जाएंगे। वहीं, 50,000 करोड़ रुपये की लागत से 50 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी।
सरकार ने योजना के लिए 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है। बैटरी भंडारण प्रणाली का इस्तेमाल नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता, ग्रिड पर दबाव और बिजली की अधिक मांग वाले समय को संभालने में किया जाएगा।
जुलाई 2026 तक भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 552 गीगावाट पहुंच चुकी थी। इसमें 300.50 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता शामिल थी। वहीं, देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 164.59 गीगावाट हो चुकी थी। सरकार का मानना है कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का तीसरा चरण भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को और गति देगा।











