नई दिल्ली, दिल्ली
7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की 57वीं बैठक में सोना, चांदी और प्लेटिनम के आयात से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। बैठक में बैंकों और सरकार की ओर से नामित एजेंसियों को कीमती धातुओं के आयात पर मिलने वाली कर छूट को खत्म करने के प्रस्ताव पर विचार किए जाने की संभावना है।
मीडिया सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सोने, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर सामान्य तौर पर 3 प्रतिशत इंटीग्रेटेड जीएसटी लगता है। हालांकि, बैंकों और सरकार द्वारा नामित एजेंसियों को इस कर से छूट मिली हुई है। अब GST काउंसिल इस व्यवस्था की समीक्षा कर सकती है।
क्यों खत्म हो सकती है टैक्स छूट?
मिली जानकारी के अनुसार, इन कीमती धातुओं के आयात पर कर छूट की व्यवस्था वर्ष 2017 में कारोबार को आसान बनाने के उद्देश्य से लागू की गई थी। उस समय सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं का आयात सीमित अधिकृत माध्यमों के जरिए होता था।
अब इस छूट को वापस लेने पर विचार इसलिए किया जा रहा है ताकि कीमती धातुओं के आयात में टैक्स व्यवस्था को अधिक समान बनाया जा सके। इससे एक्सचेंज, बैंक और सरकार की ओर से नामित एजेंसियां समान कर व्यवस्था के दायरे में आ सकती हैं।
GST काउंसिल में केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। ऐसे में 7 अक्टूबर की बैठक में इस प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर भी नजर
कीमती धातुओं के आयात से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। ऐसे में आयात से जुड़ी कर व्यवस्था में बदलाव को विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने की कोशिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
बैठक से पहले सोने, चांदी और प्लेटिनम के आयात को लेकर प्रस्तावित बदलाव चर्चा में है। हालांकि, अंतिम फैसला GST काउंसिल की बैठक में चर्चा और विचार-विमर्श के बाद ही स्पष्ट होगा।











