नई दिल्ली, भारत। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के नए रक्षा मंत्री मेहरदाद अखलाकी केताबची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के ‘मदर ऑफ ऑल बम’ से निपटने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने वाशिंगटन को खाड़ी क्षेत्र से अपनी सेना की सुरक्षित वापसी पर ध्यान देने की सलाह दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति को दी सैन्य कार्रवाई पर चेतावनी
रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि यदि ट्रंप ईरान पर बम गिराने का फैसला करते हैं, तो उन्हें इसके परिणामों के बारे में भी सोचना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों के शव वापस ले जाने की आशंका का उल्लेख करते हुए सैन्य कार्रवाई के जोखिम की ओर ध्यान दिलाया।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। ईरान की ओर से दिए गए इस संदेश का मुख्य जोर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के संभावित परिणामों और अपनी तैयारी को लेकर है।
शक्तिशाली गैर-परमाणु बम का किया उल्लेख
‘मदर ऑफ ऑल बम’ अमेरिका के जीबीयू-43/बी एमओएबी बम का लोकप्रिय नाम है। यह एक शक्तिशाली गैर-परमाणु हथियार है, जिसे बड़े क्षेत्र में विस्फोटक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए विकसित किया गया था।
ईरान के रक्षा मंत्री ने इस हथियार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका देश इससे निपटने के लिए तैयार है। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में ईरान की सैन्य तैयारियों के विशिष्ट विवरण सामने नहीं आए हैं।
ट्रंप का दावा, जल्द समाप्त हो सकता है युद्ध
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष खत्म होने के बाद तेल की कीमतें नीचे आ जाएंगी।
तेल बाजार के लिहाज से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख क्षेत्र है और यहां लंबे समय तक अस्थिरता रहने से तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए भी ऐसी परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर
ईरान की चेतावनी और ट्रंप के बयान के बीच क्षेत्रीय तनाव का भविष्य दोनों देशों की सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इन बयानों से किसी समझौते या युद्ध समाप्त होने की पुष्टि नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र की सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर नजर बनी हुई है।











