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Gold Silver Price Crash: धनतेरस-दिवाली से पहले सोना-चांदी धड़ाम, चांदी ₹8,500 टूटकर ₹1.75 लाख पर आई

नई दिल्ली, दिल्ली। धनतेरस और दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं के भाव कमजोर हुए हैं। चांदी की कीमत में 8,500 रुपये की गिरावट के बाद इसका भाव 1.75 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, सोने की कीमत भी नीचे आई है। त्योहारों से पहले आई इस गिरावट से आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों का ध्यान बाजार की ओर गया है।

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी सस्ता

वैश्विक बाजार में सोने की कीमत में करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव लगभग 3.50 प्रतिशत तक टूट गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस कमजोरी का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिला।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे चला गया। वहीं, चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली।

दिल्ली के सराफा बाजार में सोना 700 रुपये सस्ता

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सराफा बाजार में को सोने की कीमत 700 रुपये प्रति 10 ग्राम घट गई। इसके अलावा चांदी के भाव में 2,000 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह वायदा बाजार और सराफा बाजार दोनों में कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली।

धनतेरस और दिवाली से पहले खरीदारों की नजर कीमतों पर

धनतेरस और दिवाली के अवसर पर सोने-चांदी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। इस दौरान लोग आभूषण, सोने-चांदी के सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं खरीदते हैं। इसी वजह से त्योहारी सीजन में इन धातुओं की मांग बढ़ जाती है।

ऐसे समय में कीमतों में गिरावट आने से खरीदारों को राहत मिल सकती है। हालांकि, बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण खरीदारी का फैसला करने से पहले ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है।

आगे कैसी रह सकती है कीमतों की चाल?

सोने और चांदी की कीमतें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों से प्रभावित होती हैं। वैश्विक बाजार में होने वाले बदलावों का असर भारतीय बाजार में भी दिखाई देता है। इसके अलावा वायदा कारोबार में उतार-चढ़ाव भी कीमतों को प्रभावित करता है।

धनतेरस और दिवाली से पहले आई इस गिरावट के बाद अब खरीदारों और निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों पर रहेगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर कीमतों में आगे कितनी गिरावट या बढ़ोतरी होगी, इसका निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

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