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बाबरी ढांचा गिरने के बाद रो पड़ी थीं सोनिया गांधी, धर्मनिरपेक्ष भारत को लेकर कही बड़ी बात; भाजपा का पलटवार

नई दिल्ली, दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अयोध्या में वर्ष 1992 में हुए बाबरी ढांचा ध्वंस को लेकर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया सार्वजनिक की है। उन्होंने कहा कि जब विवादित ढांचे को गिराया गया था, तब वह रो पड़ी थीं। सोनिया गांधी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल उठाए हैं।

 

सोनिया गांधी ने ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ को दिए साक्षात्कार में 6 दिसंबर 1992 की घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि ढांचे के ध्वंस के बाद उन्हें महसूस हुआ कि भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी। उनके अनुसार, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके साथियों ने जिस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के निर्माण के लिए संघर्ष किया था, उसकी रक्षा करना आज भी महत्वपूर्ण है।

उनका यह बयान आगामी संस्मरण ‘बिलांगिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ के विमोचन से पहले सामने आया है। यह पुस्तक 10 नवंबर को जारी होने वाली है। संस्मरण के माध्यम से सोनिया गांधी अपने जीवन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभवों को साझा करने जा रही हैं।

भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने किया पलटवार

सोनिया गांधी की टिप्पणी सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस को निशाने पर लिया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सोनिया गांधी का बयान कांग्रेस की सोच को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सोनिया गांधी के दिल में बाबर पहले भी था और आज भी है।

भाजपा की इस प्रतिक्रिया के बाद सोनिया गांधी का बयान राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। दोनों दलों के बीच बाबरी ढांचा ध्वंस और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथा वैचारिक मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

आपातकाल पर भी सोनिया गांधी ने रखी राय

साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने आपातकाल के फैसले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे गलती बताया। साथ ही कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इस फैसले को लेकर असहज थीं। उनका यह बयान कांग्रेस के इतिहास से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय को भी चर्चा में ले आया है।

गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे का ध्वंस भारतीय राजनीति में एक निर्णायक घटना माना जाता है। इसके बाद देश में धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिक सद्भाव और राजनीतिक विचारधाराओं को लेकर लंबे समय तक बहस होती रही है।

सोनिया गांधी की ताजा टिप्पणी ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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