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कैंसर मरीजों को बड़ी राहत, 137 दवाओं के दाम 96.45% तक घटेंगे; सरकार के फैसले से होगी हजारों करोड़ की बचत

नई दिल्ली, दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत का फैसला लिया है। सरकार ने 137 कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन की सीमा निर्धारित कर दी है। इसके चलते 9 नवंबर से इन दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती लागू होगी। इस फैसले से मरीजों को सालाना अनुमानित 3,502.31 करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर की 137 दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमित किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना और कैंसर के इलाज को मरीजों के लिए आर्थिक रूप से अधिक सुलभ बनाना है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 76 दवा कंपनियों ने 121 दवाओं के कुल 1,225 फॉर्मूलेशन के संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) जमा कराए हैं। इनमें से 1,031 फॉर्मूलेशन की कीमतों में कमी की गई है। लगभग 600 ब्रांड की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक घटाई गई हैं। सबसे अधिक कटौती 96.45 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।

9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें

सरकार के फैसले के अनुसार, 9 नवंबर से संशोधित कीमतें प्रभावी होंगी। इसके बाद मरीजों को संबंधित दवाएं कम कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए। कैंसर के उपचार में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ने के कारण यह फैसला मरीजों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दवा दुकानों और अस्पतालों को दिए गए निर्देश

सरकार ने दवा विक्रेताओं, वितरकों और अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे अपनी दुकानों, परिसरों और वेबसाइटों पर संशोधित मूल्य सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को दवाओं की वास्तविक नई कीमतों की जानकारी आसानी से मिल सके।

राज्य औषधि नियंत्रकों को भी इस आदेश के अनुपालन की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि निर्धारित कीमतों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद लिया गया निर्णय

मंत्रालय के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के तहत गठित विशेषज्ञ समिति ने 17 अक्टूबर को इस संबंध में सिफारिशें दी थीं। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर एनपीपीए ने यह कदम उठाया है।

सरकार के इस फैसले से कैंसर मरीजों के इलाज का आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है। अनुमानित 3,502.31 करोड़ रुपये की सालाना बचत इस निर्णय के संभावित प्रभाव को दर्शाती है।

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