अजब भोपाल में गजब कारनामे! पहले 90 डिग्री फ्लाईओवर, अब सांप जैसा पुल, हादसों से सहमे लोग
भोपाल शहर में इन दिनों पुलों की अजीबो-गरीब डिजाइन को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कुछ सप्ताह पहले ऐशबाग फ्लाईओवर के 90 Degree के तीखे मोड़ ने सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया था। अभी उस विवाद की गूंज थमी भी नहीं थी कि सुभाष नगर में एक और पुल अपनी अनोखी ‘सांप जैसी’ संरचना के चलते चर्चा में आ गया है।
सांप जैसा ब्रिज, 8 घंटे में दो हादसे!
सुभाष नगर रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), जो भोपाल रेलवे स्टेशन और शहर के व्यस्त इलाकों को जोड़ता है, अपनी डिजाइन की वजह से अब खतरे का कारण बनता जा रहा है। इस पुल की लागत करीब 40 करोड़ रुपये आई थी और यह पिछले दो वर्षों से चालू है। लेकिन बीते कुछ दिनों में इस पुल ने शहरवासियों को डरा दिया है।
मामला तब तूल पकड़ गया जब सिर्फ आठ घंटे के भीतर दो बड़े हादसे इसी पुल पर हो गए। दोनों ही हादसों में वाहन चालकों ने पुल के तीखे मोड़ पर अपना नियंत्रण खो दिया। एक कार पुल के डिवाइडर से टकराकर हवा में पलट गई, जबकि दूसरी घटना में एक स्कूल वैन भी डिवाइडर से जा टकराई। गनीमत रही कि दोनों हादसों में कोई जान-माल की बड़ी हानि नहीं हुई।
डिजाइन पर उठे सवाल, एक्सपर्ट्स भी चिंतित
ब्रिज एक्सपर्ट्स का कहना है कि पुल की ‘सांप जैसी’ घुमावदार डिजाइन किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की डिजाइन व्यस्त यातायात वाले क्षेत्रों में बेहद खतरनाक होती है, खासतौर पर जब पुल पर पर्याप्त संकेत, बैरियर और सुरक्षा उपाय नहीं हों।
ऐशबाग फ्लाईओवर के 90 डिग्री मोड़ के बाद अब सुभाष नगर का यह मामला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आखिर किसने इस तरह के खतरनाक डिजाइनों को मंजूरी दी? और क्या इस पुल के निर्माण से पहले पर्याप्त सुरक्षा आकलन किया गया था?

जनता में बढ़ रही नाराजगी
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर दिन इस पुल से हजारों वाहन गुजरते हैं, ऐसे में इन दुर्घटनाओं को नजरअंदाज करना भविष्य में बहुत महंगा पड़ सकता है।
अब जरूरी है तुरंत सुधार
हालांकि, अभी तक किसी की जान नहीं गई है, लेकिन बीते आठ दिनों में दो बड़ी दुर्घटनाएं यह संकेत देती हैं कि इस पुल की डिजाइन में तत्काल सुधार करने की जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि यातायात इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम गठित कर इस पुल की सुरक्षा का पुनः मूल्यांकन कराए और जरूरत हो तो पुल का आंशिक या पूर्ण पुनर्निर्माण किया जाए।
भोपाल में ‘अजब इंजीनियरिंग, गजब कारनामे’ का यह सिलसिला अब रुकना चाहिए, क्योंकि सड़कों पर जनता चलती है और उसकी सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।












