पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा भाजपा सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद अब भाजपा ने जोरदार पलटवार किया है। पार्टी ने ममता बनर्जी के दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि राज्य में हो रही हिंसा और मौतों के पीछे तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी जिम्मेदार है।
शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से तृणमूल समर्थित तत्वों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है, जबकि अन्य कई घटनाएं टीएमसी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम हैं।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के विभिन्न गुटों के बीच सत्ता और प्रभाव को लेकर संघर्ष चल रहा है, जिसकी वजह से हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को बदनाम करने के लिए इन घटनाओं को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद राजनीतिक हिंसा की पुरानी संस्कृति पर काफी हद तक रोक लगी है। उनके मुताबिक, पहले आम लोग राजनीतिक हिंसा के डर में जीते थे, लेकिन अब कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है और प्रशासन अराजक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी ऐसे व्यक्ति को बख्शने के मूड में नहीं है, जो राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश करेगा। चाहे उसका राजनीतिक प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा।
इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट परिसर में ममता बनर्जी के खिलाफ लगे ‘चोर’ के नारों पर भी भाजपा ने प्रतिक्रिया दी। शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि इस तरह की भाषा भाजपा की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं है और पार्टी व्यक्तिगत अपमान की राजनीति में विश्वास नहीं करती।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जनता के भीतर जो गुस्सा दिखाई दे रहा है, वह टीएमसी की लंबे समय से चली आ रही उकसावे वाली राजनीति और भ्रष्टाचार के आरोपों का नतीजा है। भाजपा नेता ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर राज्य के विकास, उद्योग और युवाओं के रोजगार पर ध्यान देने की जरूरत है।
भट्टाचार्य ने यह भी बताया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह बंगाल की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और केंद्र सरकार राज्य में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है। ऐसे में भाजपा और टीएमसी के बीच बढ़ती बयानबाजी आने वाले समय में राज्य की राजनीति को और अधिक गर्मा सकती है।










