भोपाल, संवाददाता।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आगामी मानसून सत्र से पहले कैबिनेट में विस्तार और फेरबदल की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इसे लेकर सत्तारूढ़ भाजपा संगठन और सरकार स्तर पर मंथन तेज हो गया है।
वर्तमान में मोहन मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 31 मंत्री शामिल हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस लिहाज से अभी चार पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने की तैयारी लंबे समय से चल रही है। हालांकि, अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह विस्तार केवल खाली पदों को भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें संतुलन साधने के लिए कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। सरकार और संगठन दोनों ही स्तर पर मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन किया जा रहा है। जिन मंत्रियों का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा या जो विवादों में रहे हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि 17 मई को मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे। इन बैठकों के आधार पर मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस प्रस्तावित विस्तार के पीछे सबसे बड़ा लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनाव, यानी ‘मिशन 2028’ माना जा रहा है। पार्टी क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका दे सकती है। खासकर विंध्य, महाकोशल और ग्वालियर-चंबल अंचल से प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जहां कई वरिष्ठ नेता और दिग्गज विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल में जगह की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2023 में एक साथ विधानसभा चुनाव हुए थे, लेकिन छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार काफी पहले हो चुका है। वहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने अगस्त 2025 में ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरणों को संतुलित कर लिया था।
इसके विपरीत, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नेताओं और कई बार के विधायकों की बड़ी संख्या के चलते संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण रहा है। यही कारण है कि कैबिनेट विस्तार में अपेक्षा से अधिक समय लगा।
अब जब सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं, तो संगठन और नेतृत्व दोनों ही आगामी चुनावों की रणनीति को लेकर सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जून के अंत या जुलाई के पहले पखवाड़े तक मंत्रिमंडल विस्तार का औपचारिक ऐलान हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह विस्तार न सिर्फ सरकार के कामकाज को नई दिशा देगा, बल्कि 2028 के चुनावी समीकरणों को भी काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।












