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अमेरिका का ईरान पर सातवीं रात भी हमला, तेहरान की दोटूक चेतावनी—’हमले जारी रहे तो कोई सीमा सुरक्षित नहीं रहेगी’

वॉशिंगटन डीसी, अमेरिका

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को लगातार सातवीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। लगातार हो रही बमबारी के बाद ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि यदि हमले नहीं रुके, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की “कोई भी राजनीतिक सीमा सुरक्षित नहीं रहेगी।”

अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। सातवीं रात तक जारी अभियान के दौरान कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। CENTCOM का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कम करना और क्षेत्र में अमेरिकी हितों तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उधर, तेहरान ने अमेरिका की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने कहा कि यदि अमेरिका अगले दो से तीन दिनों तक भी हमले जारी रखता है, तो ईरान बड़े पैमाने पर जवाबी सैन्य अभियान शुरू करेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान अब केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा और संघर्ष का दायरा व्यापक हो सकता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने फारस की खाड़ी के प्रमुख बंदरगाहों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की भी चेतावनी दी है। यह बयान उस घटना के बाद आया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित एक निगरानी टावर को अमेरिकी हमले में नष्ट किए जाने की बात सामने आई। इस घटनाक्रम ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।

बताया जा रहा है कि हालिया अमेरिकी हमलों में दक्षिणी ईरान के कई पुल और परिवहन मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें बंदर अब्बास से जुड़े कुछ प्रमुख संपर्क मार्ग शामिल हैं, जो रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन हमलों के बाद ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है, जबकि अमेरिकी सहयोगी देशों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और बयानबाजी इसी तरह जारी रही, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या संघर्ष और अधिक गहराता है।

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