वाशिंगटन, अमेरिका
दुनिया भर के मौसम विशेषज्ञ अल नीनो को लेकर गंभीर चेतावनी दे रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर में जमा भारी मात्रा में गर्मी आने वाले महीनों में बाहर निकल सकती है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी इस मौसम घटनाक्रम को लेकर चेतावनी दी गई है। बताया गया है कि मौजूदा स्थिति 1950 के बाद देखे गए सबसे मजबूत अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकती है। वैज्ञानिकों ने इसकी गंभीरता को देखते हुए इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ कहा है।
प्रशांत महासागर की गर्मी बढ़ा सकती है वैश्विक तापमान
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में बड़ी मात्रा में जमा गर्मी जब वातावरण में पहुंचेगी तो इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। इससे कई क्षेत्रों में असामान्य गर्मी देखने को मिल सकती है।
मौसम वैज्ञानिक रयान माउ ने पूरी पृथ्वी का एक जलवायु नक्शा साझा किया है, जिसमें दुनिया का बड़ा हिस्सा लाल रंग में दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, अल नीनो सर्दियों के दौरान भी मजबूत बना रह सकता है और इसका प्रभाव वैश्विक तापमान पर देखने को मिलेगा।
दुनिया के बड़े हिस्से में बढ़ सकता है तापमान
वैज्ञानिकों के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव से आने वाले महीनों में पृथ्वी के बड़े हिस्से में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। मौसम में इस तरह का बदलाव अलग-अलग क्षेत्रों में गर्मी, बारिश और अन्य मौसमी परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है।
अल नीनो की मजबूत स्थिति का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक मौसम प्रणाली पर भी पड़ सकता है। इसके कारण कुछ क्षेत्रों में असामान्य गर्मी तो कुछ जगहों पर बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।
2027 तक असर रहने की आशंका
वैज्ञानिकों के आकलन के मुताबिक, अल नीनो की यह स्थिति 2027 तक बनी रह सकती है। इसी वजह से आने वाले महीनों के मौसम को लेकर विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम को लेकर जारी चेतावनियों के बीच वैज्ञानिकों का ध्यान वैश्विक तापमान में संभावित बढ़ोतरी और इसके अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों पर है। अल नीनो की तीव्रता बढ़ने पर दुनिया के कई हिस्सों में मौसम संबंधी परिस्थितियां सामान्य से अलग रह सकती हैं।











