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महाराष्ट्र के पुलगांव बेस पर सनसनी: फायरिंग प्रैक्टिस के दौरान मेजर ने JCO को मारी गोली, मौके पर मौत

महाराष्ट्र के वर्धा जिले स्थित पुलगांव सैन्य बेस में शुक्रवार सुबह एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां नियमित फायरिंग अभ्यास के दौरान सेना के एक मेजर ने कथित तौर पर अपने जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) को गोली मार दी। इस घटना में सूबेदार मेजर ओम बहादुर खंड की मौके पर ही मौत हो गई। मामले के बाद पूरे सैन्य परिसर में हड़कंप मच गया है और सेना के साथ-साथ पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, घटना पुलगांव स्थित सेंट्रल एम्युनिशन डिपो (CAD) की फायरिंग रेंज में हुई। यहां तैनात मेजर मनन तिवारी नियमित अभ्यास में हिस्सा ले रहे थे। पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, प्रैक्टिस राउंड पूरा करने के बाद मेजर तिवारी ने अचानक सूबेदार मेजर ओम बहादुर खंड पर बेहद करीब से 5.56 एमएम INSAS असॉल्ट राइफल से गोली चला दी। गोली सीधे उनकी आंख में लगी और गंभीर चोट के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

एफआईआर लांस नायक बीर सिंह धामी के बयान के आधार पर दर्ज की गई है, जो घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताए जा रहे हैं। धामी ने पुलिस को बताया कि उस समय सूबेदार मेजर खंड खाली कारतूस इकट्ठा करने में व्यस्त थे। अचानक हुई फायरिंग से वहां मौजूद जवान भी स्तब्ध रह गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गोलीबारी इतनी तीव्र थी कि मृतक के शरीर पर कई गंभीर घाव पाए गए।

घटना के तुरंत बाद फायरिंग रेंज में मौजूद अन्य सैनिकों ने मेजर मनन तिवारी को पकड़ लिया। फिलहाल वह सेना की हिरासत में हैं। बताया जा रहा है कि बाद में उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वर्धा पुलिस को सौंपा जाएगा। हालांकि शुरुआती चरण में स्थानीय पुलिस को जांच के लिए सैन्य परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी।

नागपुर स्थित सेना के प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन आर. कन्नन ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि फायरिंग अभ्यास के दौरान एक जेसीओ की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि सेना और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रही हैं। हालांकि सेना की ओर से फिलहाल इसे दुर्घटना बताया गया है, लेकिन एफआईआर में हत्या का मामला दर्ज किए जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।

मृतक सूबेदार मेजर ओम बहादुर खंड डिफेंस सिक्योरिटी कोर (DSC) में तैनात थे। यह सेना की वह इकाई है, जिसमें रिटायर हो चुके सैनिकों को दोबारा नियुक्त किया जाता है। डीएससी का मुख्य कार्य सैन्य प्रतिष्ठानों और गोला-बारूद डिपो जैसी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा करना होता है।

पुलगांव का सेंट्रल एम्युनिशन डिपो एशिया के सबसे बड़े गोला-बारूद भंडारण केंद्रों में गिना जाता है। इससे पहले भी यह बेस कई बड़े हादसों का गवाह रह चुका है। वर्ष 2016 में यहां हुए भीषण विस्फोट में 18 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें सेना के कई अधिकारी भी शामिल थे। अब इस ताजा घटना ने एक बार फिर सैन्य सुरक्षा और आंतरिक अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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