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स्क्वॉट, लंजेस से लेकर ब्रिज पोज तक: पैरों की ताकत, बैलेंस और स्टैमिना बढ़ाने वाली 6 बेहतरीन एक्सरसाइज

नई दिल्ली, दिल्ली

आज के समय में लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित जीवनशैली के कारण पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने लगी हैं। इसका असर केवल चलने-फिरने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर का संतुलन, कमर, घुटनों और रीढ़ की हड्डी भी प्रभावित हो सकती है। फिटनेस विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से कुछ आसान एक्सरसाइज करने से पैरों की ताकत, संतुलन और सहनशक्ति को बेहतर बनाया जा सकता है।

इनमें सबसे लोकप्रिय एक्सरसाइज स्क्वॉट है। स्क्वॉट करने से जांघों, कूल्हों और घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। साथ ही पेट और पीठ की मांसपेशियां भी सक्रिय रहती हैं, जिससे शरीर का संतुलन बेहतर होता है। इस दौरान पीठ सीधी रखना और नियंत्रित गति से नीचे बैठना जरूरी माना जाता है।

दूसरी महत्वपूर्ण एक्सरसाइज लंजेस है। इसमें एक पैर आगे और दूसरा पीछे रखकर शरीर को नीचे झुकाया जाता है। यह व्यायाम जांघों, कूल्हों और कोर मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से शरीर की स्थिरता और संतुलन में सुधार देखा जा सकता है।

पिंडलियों की मजबूती के लिए काफ रेज बेहद प्रभावी मानी जाती है। इसमें पंजों के बल ऊपर उठकर कुछ सेकंड रुकना और फिर धीरे-धीरे नीचे आना होता है। इससे पिंडलियों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने में मदद मिल सकती है।

वॉल-सिट उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है जो जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना पैरों की ताकत बढ़ाना चाहते हैं। दीवार के सहारे बैठने की मुद्रा में कुछ समय तक रुकने से जांघों की मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ती है और घुटनों को मजबूती मिलती है।

वहीं स्टेप-अप्स एक आसान लेकिन प्रभावी एक्सरसाइज है। इसमें सीढ़ी या मजबूत स्टेप पर चढ़ना और उतरना शामिल होता है। यह व्यायाम जांघों, कूल्हों और घुटनों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

इसके अलावा ब्रिज पोज कमर, कूल्हों, पेट और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। यह रीढ़ को सहारा देने, शरीर की स्थिरता बढ़ाने और पीठ की मजबूती बनाए रखने में मदद करता है।

फिटनेस विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी एक्सरसाइज को सही तकनीक के साथ करें और शुरुआत कम समय एवं कम रिपीटेशन से करें। यदि घुटनों, कमर, रीढ़ या जोड़ों में पहले से कोई समस्या है तो डॉक्टर या प्रशिक्षित फिटनेस ट्रेनर की सलाह लेने के बाद ही व्यायाम शुरू करें। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त आराम के साथ ये एक्सरसाइज लंबे समय तक पैरों को मजबूत रखने और संपूर्ण फिटनेस बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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