घरेलू सर्राफा बाजार में बुधवार को सोना और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में सोना 1,200 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर 1.48 लाख रुपये पर पहुंच गया, जबकि चांदी के दाम 4,000 रुपये प्रति किलोग्राम टूटकर 2.31 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बदलते रुख के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना मंगलवार के मुकाबले 1,200 रुपये कमजोर हुआ। वहीं चांदी में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले के कारोबारी सत्र में भी चांदी 10,500 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गई थी। विश्लेषकों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद चांदी की कीमतें अप्रैल के शुरुआती स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ कमोडिटी विश्लेषक सौमिल गांधी ने बताया कि अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की उम्मीदों ने निवेशकों का रुझान डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा दिया है। इसी कारण सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
विदेशी बाजारों में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमत करीब 1.3 प्रतिशत गिरकर 4,058.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि चांदी करीब दो प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60.48 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही।
मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 101 के स्तर से ऊपर पहुंच चुका है, जो पिछले कई महीनों का सर्वोच्च स्तर है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों और महंगाई पर दिए गए संकेतों ने भी डॉलर को मजबूती प्रदान की है। यही वजह है कि निवेशकों ने फिलहाल सुरक्षित निवेश के रूप में भी सोने की खरीदारी सीमित कर दी है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक शेयर बाजारों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में तेज मुनाफावसूली के चलते निवेशकों को नकदी की जरूरत महसूस हुई। ऐसे में उन्होंने सोने जैसी परिसंपत्तियों में भी बिकवाली की, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और वैश्विक आर्थिक संकेतकों में बड़ा बदलाव नहीं आता, तो सोने और चांदी की कीमतों में दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, बाजार की दिशा आने वाले आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी निर्भर करेगी।










