नई दिल्ली, दिल्ली
जीएसटी काउंसिल की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक में कर प्रशासन और जीएसटी प्रवर्तन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। इनमें जीएसटी अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकार को सीमित करने और अभियोजन की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो जीएसटी से जुड़े मामलों में कार्रवाई की मौजूदा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।
प्रस्ताव के मुताबिक, जीएसटी अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस लिया जा सकता है। यदि किसी मामले में गिरफ्तारी जरूरी मानी जाती है तो अदालत का आदेश लेना आवश्यक होगा। इससे गिरफ्तारी की प्रक्रिया में न्यायिक अनुमति को अनिवार्य किए जाने की व्यवस्था बन सकती है।
फिलहाल गंभीर जीएसटी मामलों में आयुक्त स्तर के अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बाद जीएसटी अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार प्राप्त है। एक करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत तरीके से रिफंड लेने जैसे मामलों में यह अधिकार इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके साथ ही अभियोजन की सीमा को मौजूदा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य आपराधिक कार्रवाई को बड़े और गंभीर मामलों तक सीमित करना है। सीमा बढ़ने की स्थिति में अपेक्षाकृत कम राशि वाले कर मामलों में अभियोजन की कार्रवाई से राहत मिल सकती है।
जीएसटी काउंसिल की बैठक में कर्मचारियों के बीमा प्रीमियम पर भुगतान किए गए जीएसटी को लेकर भी प्रस्ताव रखा जा सकता है। इसके तहत नियोक्ताओं को कर्मचारियों के बीमा प्रीमियम पर चुकाए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने की अनुमति देने पर विचार किया जाएगा।
इन प्रस्तावित बदलावों को जीएसटी व्यवस्था में करदाताओं और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधान में बदलाव होने पर कर अधिकारियों की कार्रवाई पर न्यायिक निगरानी बढ़ सकती है। वहीं अभियोजन की सीमा पांच करोड़ रुपये होने से आपराधिक मामलों की संख्या को अधिक गंभीर मामलों तक सीमित करने का प्रयास किया जा सकता है।
हालांकि, ये सभी बदलाव फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर हैं। इन्हें लागू करने के लिए जीएसटी काउंसिल की मंजूरी जरूरी होगी। सात अक्टूबर की बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद ही यह तय होगा कि गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी, पांच करोड़ रुपये की अभियोजन सीमा और कर्मचारियों के बीमा प्रीमियम पर ITC से जुड़े प्रस्ताव किस रूप में लागू किए जाते हैं।











