नई दिल्ली। कनाडा में प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की ओर से प्रस्तावित तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत सभी भारत-विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा करता है। उनका यह बयान कनाडा के अल्बर्टा में 18 अक्टूबर को प्रस्तावित जनमत संग्रह से जुड़ी खबरों के बीच आया है।
विदेश मंत्रालय ने इस मामले में भारत का रुख स्पष्ट करते हुए ऐसी गतिविधियों पर आपत्ति जताई है। हालांकि, प्रवक्ता ने प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी।
एसएफजे की प्रस्तावित गतिविधियों पर सुरक्षा संबंधी चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, सिख फॉर जस्टिस की ओर से कनाडा के अल्बर्टा में तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित करने की योजना है। इस संगठन पर भारत में प्रतिबंध है। प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भारत ने अपनी चिंता जाहिर की है।
रिपोर्टों में एसएफजे के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू की ओर से खालिस्तान आर्मी और सिख होमलैंड सिक्योरिटी बल बनाने का विचार सामने रखने का भी उल्लेख किया गया है। इससे संबंधित वीडियो में कनाडा में सिख युवकों को हथियारों के साथ प्रशिक्षण लेते दिखाए जाने के दावे किए गए हैं। इन घटनाक्रमों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई हैं।
रूसी सेना में फंसे भारतीयों की वापसी पर बातचीत जारी
विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता के दौरान रणधीर जायसवाल ने रूसी सेना में भर्ती किए गए भारतीय नागरिकों की वापसी को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 259 भारतीय नागरिक रूसी सेना में भर्ती किए गए थे। इनमें से 139 लोगों की भारत वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है।
भारत अब उन 69 भारतीय नागरिकों के संबंध में रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है, जिनके रूसी सेना में होने की आशंका है। उनके ठिकाने का पता लगाने और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की पहल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के मुद्दे पर भी भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा से संबंधित ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बीच इस पहल को महत्वपूर्ण बताया गया। संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) को लेकर जायसवाल ने कहा कि 1972 के शिमला समझौते के बाद यह समूह अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। भारत लंबे समय से इस मुद्दे पर यही रुख रखता आया है।
भारत-बांग्लादेश व्यापार पर भी हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय ने भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर हुई बातचीत की जानकारी भी दी। रणधीर जायसवाल के अनुसार, नई दिल्ली में दोनों देशों के संयुक्त कार्य समूह की बैठक हुई, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को लेकर भी बातचीत जारी है। वहीं, गंगा जल बंटवारे के मुद्दे पर प्रवक्ता ने कहा कि नदी और जल संबंधी मामलों पर चर्चा संयुक्त नदी आयोग के दायरे में होती है। बांग्लादेश दिसंबर 2026 में मौजूदा समझौते की अवधि समाप्त होने से पहले नए समझौते या उसमें संशोधन की मांग कर रहा है।
इस तरह विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता में कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तानी जनमत संग्रह, रूसी सेना में मौजूद भारतीय नागरिकों की वापसी, समुद्री सुरक्षा और भारत के पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों सहित कई अहम मुद्दों पर भारत का पक्ष सामने आया।











