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खंडोड़ा गांव में जलभराव से जनजीवन प्रभावित, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की बढ़ीं परेशानियां; प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

रेवाड़ी, हरियाणा।

रेवाड़ी जिले के आदर्श गांव का दर्जा प्राप्त खंडोड़ा इन दिनों जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। गांव के मुख्य मार्ग पर लंबे समय से जमा दूषित पानी ने ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाल ही में हुई बारिश के बाद हालात और अधिक खराब हो गए हैं। सड़क पर लगभग एक फीट तक गंदा पानी भर जाने से लोगों का पैदल और वाहन से आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर समस्या की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जल्द समाधान की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव की मुख्य सड़क पर जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़क पर जमा हो जाता है। बारिश होने पर स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे पूरी सड़क तालाब जैसी दिखाई देने लगती है। इससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे अधिक दिक्कत सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को हो रही है। स्कूल के सामने सड़क पर गंदा पानी भर जाने के कारण बच्चों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार फिसलने और चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे उनकी सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका कहना है कि केवल अस्थायी सफाई या पानी निकालने की कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए मजबूत जल निकासी व्यवस्था और नालियों की नियमित सफाई जरूरी है।

जलभराव के कारण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जल्द ही पानी की निकासी नहीं कराई गई तो डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बदबू और गंदगी के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव के मुख्य मार्ग से जल्द जलभराव हटाने के साथ-साथ स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए। उनका कहना है कि आदर्श गांव का दर्जा रखने वाले खंडोड़ा में इस तरह की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द कार्रवाई कर ग्रामीणों को इस परेशानी से राहत दिलाएगा।

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