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मुजफ्फरनगर की चीनी का विदेशों में बज रहा डंका, 2024-25 में 94.7 लाख टन गन्ने की हुई पेराई

मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन के मामले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर देश के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। इसे ‘शुगर बाउल ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। यहां की कृषि अर्थव्यवस्था में गन्ने की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और इसी के आधार पर चीनी, गुड़ तथा इथेनॉल जैसे उद्योगों का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ है।

गंगा-यमुना दोआब की उपजाऊ भूमि और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था ने मुजफ्फरनगर को गन्ने की खेती के लिए अनुकूल क्षेत्र बनाया है। किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करते हैं और यही गन्ना जिले की चीनी मिलों के लिए मुख्य कच्चा माल बनता है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुजफ्फरनगर जिले में 11 चीनी मिलें हैं। ये मिलें जिले और आसपास के क्षेत्रों के किसानों से गन्ने की खरीद करती हैं। इसके अलावा जिले का गुड़ बाजार भी बेहद बड़ा है और इसे दुनिया के सबसे बड़े गुड़ बाजारों में गिना जाता है।

9.6 लाख टन चीनी का उत्पादन

2024-25 के सीजन में मुजफ्फरनगर की चीनी मिलों ने करीब 94.7 लाख टन गन्ने की पेराई की। इससे लगभग 9.6 लाख टन चीनी तैयार हुई। यह आंकड़ा जिले में चीनी उद्योग के बड़े पैमाने को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश के कृषि आंकड़ों के मुताबिक, इसी अवधि में जिले में लगभग 1.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई। जिले में गन्ने का उत्पादन करीब 1.51 करोड़ टन रहा।

इस उत्पादन का असर केवल चीनी मिलों तक नहीं रहता। गन्ने की कटाई, खेतों से मिलों तक परिवहन, मिलों में प्रसंस्करण और तैयार उत्पादों के वितरण तक बड़ी संख्या में लोग इस आर्थिक गतिविधि से जुड़े होते हैं।

चीनी के साथ इथेनॉल पर भी जोर

गन्ने और चीनी उद्योग से जुड़े उप-उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में भी किया जाता है। इससे चीनी मिलों को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करने का अवसर मिलता है। गन्ने पर आधारित यह विविध कारोबार क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करता है।

मुजफ्फरनगर का गुड़ बाजार भी इस पूरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां तैयार गुड़ देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है और इसके कारोबार से जुड़े व्यापारी तथा श्रमिक बड़ी संख्या में आर्थिक गतिविधियों में शामिल होते हैं।

दुबई से तंजानिया तक पहुंच

मुजफ्फरनगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से तैयार होने वाली चीनी की पहुंच अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भी हो रही है। दुबई और तंजानिया जैसे विदेशी बाजारों तक यूपी की चीनी पहुंचना इस क्षेत्र के निर्यात कारोबार की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है।

गन्ने के खेत से शुरू होकर चीनी मिल और फिर देश-विदेश के बाजार तक पहुंचने वाली यह पूरी श्रृंखला मुजफ्फरनगर को कृषि और उद्योग के बीच मजबूत कड़ी बनाती है।

इसी वजह से मुजफ्फरनगर की पहचान अब सिर्फ एक गन्ना उत्पादक जिले के रूप में नहीं, बल्कि चीनी, गुड़ और इथेनॉल के बड़े केंद्र के रूप में होती है। किसानों की मेहनत और स्थानीय उद्योग के तालमेल ने इसे ‘भारत का शुगर बाउल’ की पहचान दिलाई है।

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