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RBI ने ब्याज दर निर्धारण के नियमों का मसौदा जारी किया, बैंक और NBFC के लिए समान व्यवस्था का प्रस्ताव

मुंबई, महाराष्ट्र

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कपनियों (NBFC) के लिए ऋण पर ब्याज दर तय करने के नियमों को अधिक समान और व्यापक बनाने की दिशा में कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को ‘ऋण एवं अग्रिम पर ब्याज दर' से जुड़े दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया। RBI ने इस मसौदे पर जनता और सभी सबंधित पक्षों से सितंबर तक सुझाव मांगे हैं।

RBI की अधिसूचना के अनुसार, वर्तमान में ऋण पर ब्याज दरों से संबंधित नियामकीय व्यवस्था मुख्य रूप से वाणिज्यिक बैंकों के लिए लागू है। दूसरी तरफ, NBFC संस्थानों के मामले में ब्याज दर से संबंधित व्यवस्था मुख्य रूप से आचरण संबंधी नियमों के दायरे में आती है। केंद्रीय बैंक ने अब इन अलग-अलग व्यवस्थाओं में समानता लाने के लिए सभी विनियमित संस्थाओं पर लागू होने वाले व्यापक निर्देशों का प्रस्ताव रखा है।

ब्याज दर तय करने के लिए सिद्धांत आधारित ढांचा

मसौदे में सभी विनियमित संस्थाओं के लिए ब्याज दर निर्धारण से जुड़े समान व्यापक सिद्धांत तय करने का प्रस्ताव है। इसके तहत स्थिर ब्याज दर वाले ऋण और परिवर्तनशील ब्याज दर वाले ऋण, दोनों को शामिल किया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था में ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को संस्थान की वास्तविक कारोबारी परिस्थितियों के अनुरूप रखने की बात कही गई है। इसके लिए संबंधित संस्था के कारोबार की प्रकृति, आकार और जटिलता को ध्यान में रखा जाएगा। इस तरह RBI एक ऐसा नियामकीय ढांचा तैयार करना चाहता है, जो अलग-अलग प्रकार की वित्तीय संस्थाओं पर लागू हो सके।

अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव

RBI ने मसौदे में प्रस्तावित नियमों का नाम ‘भारतीय रिजर्व बैंक (ऋण एवं अग्रिम पर ब्याज दर) दिशानिर्देश, 2026′ रखा है। केंद्रीय बैंक ने इन्हें अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, फिलहाल ये अंतिम नियम नहीं हैं। RBI ने मसौदा जारी करके संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया मांगी है। बैंक, NBFC, वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्ष और आम जनता सितंबर तक अपने सुझाव और टिप्पणियां भेज सकते हैं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद RBI अंतिम दिशानिर्देश जारी करेगा।

मौजूदा व्यवस्था में क्या अंतर है?

वर्तमान में वाणिज्यिक बैंकों और NBFC के लिए ऋण पर ब्याज दर से जुड़े नियामकीय प्रावधान पूरी तरह समान नहीं हैं। बैंकों के लिए ब्याज दर निर्धारण से संबंधित अलग नियामकीय व्यवस्था है, जबकि NBFC के मामले में मुख्य रूप से आचरण संबंधी प्रावधान लागू होते हैं।

नए मसौदे के जरिए RBI इन अंतर को कम करने और सभी विनियमित संस्थाओं के लिए ब्याज दर निर्धारण के संबंध में एक व्यापक सिद्धांत आधारित व्यवस्था तैयार करना चाहता है।

केंद्रीय बैंक की यह पहल ऋण और अग्रिम पर ब्याज दर तय करने से जुड़े नियामकीय ढांचे को अधिक व्यवस्थित और एकरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अंतिम नियम सुझावों की समीक्षा के बाद तय किए जाएंगे।

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