मुंबई, महाराष्ट्र
IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वोकाडे की आत्महत्या के मामले में उनके माता-पिता ने नामजद फैकल्टी सदस्यों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल उठाए हैं। साहिल के पिता रवींद्र वोकाडे और मां सोनाली वोकाडे मंगलवार को मुंबई क्राइम ब्रांच पहुंचे और मामले में आरोपी बनाए गए प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला और शिरीष केदारे की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
परिवार का आरोप है कि साहिल को कथित तौर पर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। हालांकि, इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है और मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
पिता ने पूछा- आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
साहिल के पिता रवींद्र वोकाडे ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनके पास मामले से जुड़े सबूत मौजूद हैं तो अब तक नामजद आरोपियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला और शिरीष केदारे पर जातिगत भेदभाव के आधार पर साहिल को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। परिवार ने दोनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
‘फोन पर बात हुई तो वह रो रहा था'
साहिल के पिता ने मीडिया से बातचीत में अपने बेटे के साथ हुई आखिरी बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फोन पर बात करते समय साहिल रो रहा था और उसने कथित तौर पर जातिगत भेदभाव के कारण परेशान किए जाने की बात कही थी।
परिवार के मुताबिक, साहिल की बातचीत और अन्य उपलब्ध सामग्री मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। माता-पिता चाहते हैं कि पुलिस इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच करे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
क्राइम ब्रांच से कार्रवाई की मांग
साहिल के माता-पिता मंगलवार को मुंबई क्राइम ब्रांच पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत तथा आरोपों को लेकर कार्रवाई की मांग रखी। उन्होंने नामजद फैकल्टी सदस्यों की गिरफ्तारी पर जोर दिया।
मामला संवेदनशील होने के कारण पुलिस की जांच में साहिल के परिवार के आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों, कथित बातचीत और अन्य संबंधित तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल परिवार की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
साहिल वोकाडे की मौत के बाद परिवार द्वारा उठाए गए सवालों ने संस्थानों में छात्रों के साथ कथित भेदभाव और शिकायतों के निवारण की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। मामले में आगे की पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और आरोपों में कितनी सच्चाई है।












