New Delhi, Delhi
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच निर्वाचन आयोग के नए वोटर पंजीकरण फॉर्म Form 6 से जुड़ा विवाद भी सामने आया है। विवाद उस अतिरिक्त घोषणा को लेकर है, जिसके तहत नए आवेदकों से उनके, माता-पिता या दादा-दादी के नाम पिछली SIR मतदाता सूची में होने की जानकारी मांगी गई।
Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आवेदन है। निर्वाचन आयोग के Voters' Services Portal के जरिए भी नागरिक मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने Form 6 से जुड़ी इस नई व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि सवाल यह था कि निर्धारित कानूनी नियमों में संशोधन किए बिना Form 6 के साथ ऐसी अतिरिक्त आवश्यकता जोड़ी जा सकती है या नहीं।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इस दावे पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि मूल Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया। SIR के तहत एक अतिरिक्त घोषणा को Form 6 के साथ जोड़ा गया था।
14 आपत्तियों से बढ़ी राजनीतिक हलचल
मामले को तब और तूल मिला जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। इनमें Form 6, मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
निर्वाचन आयोग ने हालांकि किसी संस्थागत दरार की बात को खारिज करते हुए कहा कि SIR और अन्य फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए।
SIR में कितने नाम हटे?
रिपोर्ट के अनुसार, SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। इससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हुआ।
कौन-कौन हैं प्रमुख किरदार?
इस पूरे विवाद में मुख्य रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी चर्चा में हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग की IT व्यवस्था और ECINet से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लागू करने का कानूनी आधार क्या है और इसका पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं पर क्या असर पड़ेगा। निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बाद अब विवाद का केंद्र Form 6 में बदलाव और अतिरिक्त Annexure के बीच के अंतर पर आ गया है।











