गुवाहाटी: असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर दिया। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC कानून लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए सभी नागरिकों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।
विधानसभा में लंबी चर्चा के बाद विधेयक को बहुमत से मंजूरी दी गई। विपक्षी दलों ने इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे तत्काल पारित कराने का फैसला किया। सरकार का कहना है कि यह कानून नागरिकों को समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नए कानून के तहत विवाह पंजीकरण, तलाक की प्रक्रिया, संपत्ति के उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लागू होगा। राज्य सरकार का दावा है कि इससे कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समानता बढ़ेगी।
गौरतलब है कि उत्तराखंड ने सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू की थी, जबकि गुजरात विधानसभा ने भी इस दिशा में कानून को मंजूरी दी थी। अब असम भी इस सूची में शामिल हो गया है। वहीं, गोवा में लंबे समय से एक समान नागरिक कानून लागू है, जो पुर्तगाली शासनकाल की व्यवस्था पर आधारित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में UCC कानून लागू होने के बाद अन्य राज्यों में भी इस विषय पर बहस और तेज हो सकती है।












