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राजस्थान बॉर्डर अलर्ट: 5 सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा का बड़ा एक्शन, अब हर निर्माण पर DM-SP की मंजूरी जरूरी

राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पांच जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक और सुरक्षा प्लान तैयार किया गया है। केंद्र और राज्य स्तर पर हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद अब सीमावर्ती क्षेत्रों में हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। नए दिशा-निर्देशों के तहत सीमा से जुड़े 50 किलोमीटर क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य जिला प्रशासन और पुलिस की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलौदी जिलों में यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों के कारण घुसपैठ, अवैध तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसी वजह से अब हर निर्माण कार्य पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में करीब 26 हजार पुराने निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इनमें कई निर्माण ऐसे बताए जा रहे हैं जिनकी वैधता और उपयोगिता की जांच की जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि संदिग्ध और नियमों के विरुद्ध पाए जाने वाले निर्माण अगले दो माह में हटाए जा सकते हैं। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।

हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीकानेर में सीमा सुरक्षा को लेकर एक अहम बैठक की थी। बैठक में बीएसएफ, गृह मंत्रालय, राजस्थान सरकार, पुलिस विभाग और सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। इसी बैठक में सीमा सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइन तय की गई थी। अब उन निर्देशों को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

प्रशासन ने थाना अधिकारियों और तहसील स्तर के कर्मचारियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सीमावर्ती गांवों में किसी नए व्यक्ति या परिवार के आने की सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचानी होगी। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि सीमा क्षेत्र में बाहरी लोगों की गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जा सके।

इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में बैंक खातों की भी जांच की जाएगी। विशेष रूप से म्यूल अकाउंट यानी ऐसे खातों पर कार्रवाई की योजना है जिनका इस्तेमाल अवैध लेनदेन या संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। प्रशासन विभिन्न बैंकों से खाताधारकों का रिकॉर्ड जुटाने में लगा हुआ है।

सरकार केवल सुरक्षा व्यवस्था पर ही ध्यान नहीं दे रही बल्कि सीमावर्ती गांवों के विकास पर भी बड़ा निवेश करने जा रही है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2 के तहत करीब 550 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि से सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि विकास कार्यों से जहां ग्रामीणों का जीवन बेहतर होगा, वहीं सुरक्षा बलों की आवाजाही और निगरानी व्यवस्था भी आसान होगी।

सीमावर्ती पांच जिलों के अधिकारियों ने 184 गांवों का दौरा करने की योजना बनाई है। इस दौरान ग्रामीणों से संवाद कर सुरक्षा और विकास से जुड़े सुझाव भी लिए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन बनाए रखना और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि पलायन की स्थिति न बने।

राजस्थान में पहली बार सीमा सुरक्षा और विकास को एक साथ जोड़कर इतनी व्यापक योजना लागू की जा रही है। आने वाले समय में इसका असर सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण दोनों पर देखने को मिल सकता है

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