National Commission for Women (NCW) ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ में व्यापक सुधारों की सिफारिश की है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कई कानूनी अस्पष्टताएं हैं, जिनकी वजह से महिलाओं को समानता, न्याय और गरिमा के अधिकार हासिल करने में कठिनाई होती है।
एनसीडब्ल्यू ने ‘Rights of Muslim Women in India’ शीर्षक से तैयार रिपोर्ट गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को सौंपी है। यह रिपोर्ट देशभर में विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और धार्मिक विद्वानों के साथ चर्चा के बाद तैयार की गई।
मुस्लिम पर्सनल लॉ को संहिताबद्ध करने की मांग
आयोग का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को स्पष्ट और एकीकृत कानून के रूप में लागू किया जाना चाहिए। वर्तमान में यह व्यवस्था मुख्य रूप से 1937 के मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट और अलग-अलग कानूनी प्रावधानों पर आधारित है।
रिपोर्ट के अनुसार, कानून स्पष्ट न होने के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में नियमों की अलग-अलग व्याख्या की जाती है, जिससे महिलाओं को न्याय पाने में परेशानी होती है और लंबे कानूनी विवाद पैदा होते हैं।
2025 की उच्चस्तरीय बैठक में हुई थी चर्चा
एनसीडब्ल्यू ने 1 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक आयोजित की थी। इसमें केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, महिला संगठनों के प्रतिनिधि, धार्मिक विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए थे। बैठक में मुस्लिम महिलाओं से जुड़े कानूनों की समीक्षा और उनमें सुधार के सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
रिपोर्ट में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
आयोग ने कहा कि बाल विवाह, असमान विरासत, बहुविवाह और तत्काल तीन तलाक जैसी प्रथाओं का प्रभाव अब भी विभिन्न रूपों में दिखाई देता है। रिपोर्ट में जोर दिया गया कि मुस्लिम महिलाओं को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मिलने वाले समानता, भेदभाव से सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार पूरी तरह मिलने चाहिए।
NCW की प्रमुख सिफारिशें
रिपोर्ट में कई अहम सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- मुस्लिम विवाह का अनिवार्य पंजीकरण
- बाल विवाह पर पूरी तरह रोक
- तलाक की प्रक्रिया में महिलाओं को समान अधिकार
- गुजारा भत्ता और बच्चों की कस्टडी में न्यायसंगत व्यवस्था
- मेहर और वैवाहिक संपत्ति में महिलाओं के अधिकार मजबूत करना
- विरासत संबंधी कानूनों को स्पष्ट और समान बनाना
- महिलाओं के लिए कानूनी सहायता और हेल्पलाइन बढ़ाना
- जागरूकता अभियान चलाना
- ‘पारो’ जैसी शोषणकारी प्रथाओं पर रोक और पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था
सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील
एनसीडब्ल्यू ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से इन सिफारिशों को जल्द लागू करने की मांग की है। आयोग का मानना है कि इससे मुस्लिम महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और कानूनी सुरक्षा अधिक प्रभावी तरीके से मिल सकेगी तथा उन्हें समान अधिकार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।












