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इंस्टाग्राम से दोस्ती, जंगी ऐप पर बातचीत; ऐसे बुना जा रहा था आतंकी नेटवर्क

सहारनपुर: सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अब केवल संवाद और मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ आतंकी और आपराधिक नेटवर्क युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं। सहारनपुर से गिरफ्तार किए गए मोहतशिम से पूछताछ के दौरान ऐसे ही एक संदिग्ध नेटवर्क के संचालन से जुड़े अहम सुराग सामने आए हैं।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि युवाओं से सबसे पहले इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क स्थापित किया जाता था। शुरुआत में सामान्य बातचीत और दोस्ती का माहौल बनाया जाता था ताकि सामने वाले का भरोसा जीता जा सके। जब संपर्क मजबूत हो जाता था, तब बातचीत को एक कथित जंगी ऐप पर स्थानांतरित कर दिया जाता था।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की रणनीति निगरानी से बचने के उद्देश्य से अपनाई जाती है। जंगी ऐप पर होने वाली बातचीत अपेक्षाकृत अधिक गोपनीय बताई जा रही है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए गतिविधियों पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के संपर्क में कितने युवा आए थे। डिजिटल उपकरणों और चैट रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह समझने का प्रयास कर रही हैं कि युवाओं को किस प्रकार प्रभावित किया जाता था और संपर्क बढ़ाने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में युवाओं को अनजान लोगों से ऑनलाइन दोस्ती करते समय सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या प्रस्ताव की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को देनी चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे नेटवर्क से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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