Home » ताजा खबर » Sonam Wangchuk: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना क्यों खत्म किया 26 दिन का अनशन? सोनम वांगचुक ने बताई बड़ी वजह

Sonam Wangchuk: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना क्यों खत्म किया 26 दिन का अनशन? सोनम वांगचुक ने बताई बड़ी वजह

नई दिल्ली, दिल्ली

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों के प्रबल समर्थक सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। हालांकि उनके आंदोलन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी, लेकिन यह मांग पूरी हुए बिना ही उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया। अब वांगचुक ने स्वयं इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा है कि उनके लिए किसी व्यक्ति का इस्तीफा नहीं, बल्कि आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।

59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक दबाव बनाना नहीं था, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल के दौरान उन्हें सबसे अधिक चिंता उन छात्रों और समर्थकों की थी, जिन्होंने कथित परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ में हिस्सा लिया था। वांगचुक के अनुसार, यदि आंदोलन जारी रहता और प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई होती, तो उसका सबसे अधिक नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता।

उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल युवाओं और समर्थकों की सुरक्षा किसी भी अन्य मांग से अधिक महत्वपूर्ण थी। इसी कारण जब केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन मिला, तब उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। उनके मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य छात्रों को न्याय दिलाना था, न कि उन्हें किसी कानूनी संकट में डालना।

सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना 26 दिन का अनशन समाप्त किया। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद लिया गया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि ‘संसद चलो मार्च’ में शामिल छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा और उनके विरुद्ध किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस आश्वासन को वांगचुक ने आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

सरकार ने इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े मुद्दों पर भी सकारात्मक रुख दिखाने का भरोसा दिया है। केंद्र की ओर से आश्वासन दिया गया है कि संसद में कथित पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। साथ ही, नीट (NEET) पेपर लीक मामले के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी विचार करने की बात कही गई है। इन आश्वासनों को भी वांगचुक ने महत्वपूर्ण कदम बताया, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता उसके आगामी फैसलों से ही साबित होगी।

वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना ही उनके अभियान का मुख्य उद्देश्य रहा है। उनके अनुसार, यदि सरकार इन मुद्दों पर ठोस और प्रभावी कदम उठाती है, तो वही इस आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता मानी जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार अपने लिखित आश्वासनों को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी लागू करेगी।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उनके आंदोलन को देशभर के छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। सोशल मीडिया पर भी उनके अभियान को व्यापक समर्थन मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को उचित बताया।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने छात्रों का भरोसा प्रभावित किया है। ऐसे में यदि सरकार परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रभावी सुधार लागू करती है, तो इससे लाखों छात्रों का विश्वास दोबारा मजबूत हो सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी आवश्यक होंगे।

फिलहाल सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त हो चुका है, लेकिन शिक्षा सुधारों की मांग अभी भी राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई है। अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजर केंद्र सरकार के अगले कदमों पर टिकी है। यदि सरकार अपने वादों के अनुरूप परीक्षा सुधारों, पेपर लीक रोकने के उपायों और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस निर्णय लेती है, तो इसे देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाएगा।

मनोरंजन
संबंधित समाचार
E-Paper image 2