नई दिल्ली, दिल्ली
इंडोनेशिया में प्रतिकूल मौसम और पाम तेल की घरेलू खपत बढ़ने की आशंका ने वैश्विक खाद्य तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन (गैपकी) ने चेतावनी दी है कि भीषण अल-नीनो और सूखे के कारण देश के क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है। इसका असर आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारत में खाद्य तेलों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
गैपकी के चेयरमैन एडी मार्टोनो के अनुसार, इंडोनेशिया में कुल पाम तेल उत्पादन करीब 5.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है। हालांकि, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन में करीब 50 लाख टन तक की कमी आने की आशंका जताई जा रही है। उत्पादन घटने के साथ ही वैश्विक बाजार में उपलब्ध पाम तेल की मात्रा पर दबाव बढ़ सकता है।
बी50 नीति से घरेलू खपत बढ़ने की संभावना
इंडोनेशिया में सरकार डीजल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पाम तेल आधारित बायोडीजल की ब्लेंडिंग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बी40 के बाद बी50 नीति लागू होने पर बायोडीजल क्षेत्र में पाम तेल की घरेलू खपत और बढ़ सकती है।
गैपकी के अनुमान के मुताबिक, बी50 के तहत बायोडीजल के लिए करीब 1.63 से 1.70 करोड़ टन पाम तेल की घरेलू खपत हो सकती है। ऐसे में उत्पादन में गिरावट और घरेलू मांग बढ़ने का दोहरा असर निर्यात पर पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की उपलब्धता कम होने की संभावना है।
भारत पर क्यों पड़ सकता है असर?
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। देश में हर साल बड़ी मात्रा में पाम तेल का आयात किया जाता है और इसके लिए भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया तथा मलेशिया पर निर्भर है।
यदि इंडोनेशिया से निर्यात घटता है और मलेशिया में भी मौसम संबंधी कारणों से उत्पादन प्रभावित होता है, तो भारत के लिए आयातित पाम तेल की कीमत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर रिफाइंड खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ सकता है।
पाम तेल की कीमतों में तेजी आने पर खाद्य तेलों की मांग सोयाबीन, सूरजमुखी और सरसों तेल की ओर भी स्थानांतरित हो सकती है। मांग बढ़ने की स्थिति में इन तेलों की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।
फिलहाल भारत में पर्याप्त स्टॉक
हालांकि, घरेलू बाजार के लिए तत्काल चिंता की स्थिति नहीं बताई गई है। सरकार के अनुसार देश में करीब 14–15 लाख टन खाद्य तेल का स्टॉक उपलब्ध है, जो लगभग डेढ़ महीने की घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
इसके अलावा सितंबर से सोयाबीन और मूंगफली की नई फसल की आवक शुरू होने की उम्मीद है। इससे घरेलू बाजार में खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है और आयात पर कुछ दबाव कम हो सकता है।
फिलहाल खाद्य तेलों की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना को लेकर स्थिति मौसम, इंडोनेशिया के निर्यात और बायोडीजल नीति के वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक आपूर्ति में बड़ी कमी आती है, तो आने वाले समय में भारत में खाद्य तेल महंगा होने का दबाव जरूर बढ़ सकता है।