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छत्तीसगढ़ में 1000 करोड़ रुपये के दिव्यांग कल्याण घोटाले की जांच तेज, दो पूर्व मुख्य सचिवों समेत पांच IAS अधिकारी घेरे में

रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ में दिव्यांग कल्याण से जुड़े कथित एसआरसी-पीआरआरसी घोटाले की जांच तेज हो गई है। करीब 1000 करोड़ रुपये की संभावित वित्तीय अनियमितताओं के इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अपनी पड़ताल आगे बढ़ा रहा है। जांच एजेंसी आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी में जुटी है। मामले में दो पूर्व मुख्य सचिवों समेत पांच वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के नाम सामने आए हैं।

जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। इसके साथ ही मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ और आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी जारी है। इस मामले ने राज्य में दिव्यांग कल्याण योजनाओं के संचालन और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम आए सामने

मामले से जुड़ी याचिका में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ और सुनील कुजूर के नाम शामिल हैं। इनके अलावा डॉ. आलोक शुक्ला, एमके राउत और बीएल अग्रवाल का भी उल्लेख किया गया है। जांच से जुड़े मामले में सतीश पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी और अशोक तिवारी के नाम भी सामने आए हैं। तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह का संदर्भ भी इस प्रकरण में दिया गया है।

हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम याचिका या जांच के संदर्भ में सामने आने मात्र से उसके खिलाफ आरोप साबित नहीं होते। मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।

कागजों पर नियुक्तियां दिखाकर वेतन निकालने का आरोप

सीबीआई का दावा है कि कथित अनियमितताओं के तहत कागजों पर कर्मचारियों की नियुक्तियां दिखाकर वेतन की रकम निकाली गई। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि सरकारी धन के वितरण और कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रियाओं में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।

करीब 1000 करोड़ रुपये की संभावित वित्तीय गड़बड़ी का आंकड़ा इस मामले को गंभीर बनाता है। जांच एजेंसी दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को समझने में जुटी है।

हाई कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई जांच

दिव्यांग कल्याण से जुड़े इस मामले की जांच छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी। अब सीबीआई की जांच आगे बढ़ने और आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर ध्यान बढ़ गया है।

फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य कथित अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति, सरकारी धन के इस्तेमाल और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का पता लगाना है। आरोप पत्र दाखिल होने तथा न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद मामले से जुड़े तथ्यों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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