आइजोल, मिजोरम। रणजी ट्रॉफी में मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नागालैंड के खिलाफ 400 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर घरेलू क्रिकेट में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस पारी ने उन्हें प्रथम श्रेणी क्रिकेट के उन चुनिंदा बल्लेबाजों की सूची में पहुंचा दिया है, जिन्होंने एक ही पारी में 400 रन बनाए हैं। चिन्मय इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज और विश्व स्तर पर दसवें प्रथम श्रेणी क्रिकेटर बने हैं।
29 वर्षीय बल्लेबाज के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर के दूसरे ही मुकाबले में यह कारनामा किया। उनकी पारी ने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा है। इस प्रदर्शन के साथ उनका नाम ब्रायन लारा और डॉन ब्रैडमैन जैसे दिग्गज बल्लेबाजों की उपलब्धियों से जुड़ी चर्चा में शामिल हो गया है।
मुंबई में जन्मे चिन्मय सुतार कौन हैं?
चिन्मय सुतार का जन्म मुंबई में हुआ था। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत वहीं आयु वर्ग की क्रिकेट खेलकर की। मुंबई में रहते हुए उन्होंने घरेलू क्रिकेट में आगे बढ़ने का प्रयास किया। इसी साल उन्हें विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई की ओर से खेलने का मौका मिला। महाराष्ट्र के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने पदार्पण किया था। हालांकि, अपने पहले मैच में वह केवल दो रन बनाकर आउट हो गए थे।
इसके बाद उन्हें मुंबई की टीम में नियमित अवसर नहीं मिल सके। बेहतर मौके और अधिक खेलने का अनुभव हासिल करने के लिए उन्होंने मिजोरम की ओर से खेलने का निर्णय लिया। यह फैसला उनके करियर में महत्वपूर्ण साबित हुआ। मिजोरम के लिए अपने दूसरे प्रथम श्रेणी मुकाबले में ही उन्होंने 400 रन की शानदार पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
99 रन के बाद खेली 400 रन की पारी
चिन्मय ने अपने पिछले मुकाबले की दूसरी पारी में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस मैच में वह 99 रन बनाकर आउट हो गए थे और शतक पूरा करने से चूक गए थे। हालांकि, अगले मुकाबले में उन्होंने बड़ी पारी खेलकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता साबित कर दी। नागालैंड के खिलाफ उनके 400 रन ने उन्हें प्रथम श्रेणी क्रिकेट के ऐतिहासिक रिकॉर्ड वाले बल्लेबाजों में शामिल कर दिया।
क्रिकेट से जुड़ा है परिवार
चिन्मय का पालन-पोषण ऐसे परिवार में हुआ, जहां क्रिकेट का महत्वपूर्ण स्थान था। उनके पिता राजेश भी क्रिकेट खेलते थे और सचिन तेंदुलकर के साथ पारी की शुरुआत कर चुके हैं। परिवार से मिले क्रिकेट के माहौल ने चिन्मय की खेल यात्रा को शुरुआती दौर से प्रभावित किया।
हालांकि, उनके लिए क्रिकेट का सफर आसान नहीं रहा। 15 वर्ष की उम्र में उन्हें गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा था। इसके कारण वह लगभग 11 महीने तक क्रिकेट से दूर रहे। इस चुनौती के बावजूद उन्होंने खेल में वापसी की और अपने प्रदर्शन से आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा।
पहले भी दिखा चुके हैं अपनी क्षमता
वर्ष 2019 में चिन्मय ने हांगकांग के खिलाफ भारतीय राइजिंग टीम की ओर से खेलते हुए 104 रन की पारी खेली थी। अब रणजी ट्रॉफी में 400 रन बनाकर उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है। मुंबई में सीमित अवसर मिलने के बाद मिजोरम के लिए खेलते हुए उनका यह प्रदर्शन घरेलू क्रिकेट में उनकी पहचान मजबूत करने वाला साबित हुआ है।











