Mandsaur, Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का धमनार गांव दशहरे के पर्व को स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता के साथ जोड़कर मनाता है। यहां रावण दहन के साथ गंदगी को दूर करने का संकल्प भी लिया जाता है। गांव में पिछले 58 वर्षों से दशहरे के दिन स्वच्छता उत्सव मनाने की परंपरा जारी है। इस अवसर पर घरों और आंगन की साफ-सफाई का मूल्यांकन किया जाता है तथा बेहतर स्वच्छता रखने वाले परिवारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है।
दशहरे के दिन गांव के लोग अपने घरों और आसपास के परिसर को साफ-सुथरा बनाने में जुटते हैं। हर घर के बाहर रंगोली सजाई जाती है। इसके बाद साफ-सफाई के आधार पर घरों का आकलन किया जाता है। शाम को रावण दहन के दौरान प्रतियोगिता के परिणाम सामने आते हैं। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले परिवारों को पुरस्कार दिए जाते हैं।
इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने और अपने आसपास साफ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। खास बात यह है कि यह परंपरा किसी एक दिन की सफाई तक सीमित नहीं, बल्कि स्वच्छता को सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का संदेश देती है।
वर्ष 1965 में रखी गई थी परंपरा की नींव
धमनार गांव में स्वच्छता उत्सव की शुरुआत वर्ष 1965 में हुई थी। उस समय किसान नेता हीरालाल धाकड़ गांव के सरपंच बने थे। इसी दौर में प्लेग महामारी का प्रकोप फैल रहा था। स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें बताया कि गंदगी भी बीमारियों के फैलने का एक कारण बन सकती है।
इस जानकारी के बाद गांव में साफ-सफाई के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए स्वच्छता को सामूहिक प्रयास से जोड़ने की पहल की गई। समय बीतने के साथ यह प्रयास दशहरे के आयोजन का हिस्सा बन गया और धीरे-धीरे एक स्थायी परंपरा के रूप में स्थापित हो गया।
दशहरे के संदेश को दिया सामाजिक रूप
दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। देशभर में इस दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन धमनार गांव में इस अवसर पर गंदगी को भी एक बुराई के रूप में दूर करने का संदेश दिया जाता है।
वर्ष 2014 में देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई थी। हालांकि, धमनार गांव में इससे कई दशक पहले ही स्वच्छता को सामाजिक जीवन से जोड़ने की पहल हो चुकी थी। यहां दशहरे के आयोजन के माध्यम से परिवारों को साफ-सफाई के प्रति जिम्मेदार बनाया जाता है।
58 वर्षों से जारी यह परंपरा बताती है कि स्थानीय स्तर पर शुरू की गई जागरूकता की पहल लंबे समय तक समाज को प्रभावित कर सकती है। धमनार का स्वच्छता उत्सव त्योहार को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का एक उदाहरण है, जिसमें उत्सव के साथ स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश भी दिया जाता है।











