नई दिल्ली, दिल्ली: देश में एसिड अटैक की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल भावुक भाषा में सर्कुलर जारी करने से एसिड की बिक्री और उसके दुरुपयोग पर रोक लगाने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि एसिड की खुदरा बिक्री पर रोक से संबंधित दिशानिर्देशों का जमीन पर प्रभावी ढंग से पालन हो।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार केवल दिशानिर्देश जारी करके अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। यदि नियम बनाए जाने के बावजूद एसिड अटैक की घटनाएं जारी हैं, तो यह व्यवस्था की खामियों और दिशानिर्देशों के कमजोर क्रियान्वयन की ओर संकेत करता है।
दिशानिर्देशों के पालन पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि दिशानिर्देशों के बावजूद जिन राज्यों में एसिड अटैक की घटनाएं हुईं, उनसे जवाब मांगने के लिए क्या कदम उठाए गए। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि केवल राज्यों को निर्देश भेज देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उनका पालन हो रहा है या नहीं।
अदालत ने कहा कि यदि सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देशों के बाद भी ऐसी गंभीर घटनाएं हो रही हैं, तो संबंधित नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पीठ ने प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि नियमों के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई की जा सके।
केंद्र ने स्वीकार किया कमजोर क्रियान्वयन
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने अदालत को बताया कि एसिड की खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए राज्यों को विस्तृत दिशानिर्देश भेजे गए थे। राज्यों ने भी इस संबंध में नियम बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन बेहद कमजोर रहा है।
इस स्वीकारोक्ति के बाद एसिड की बिक्री को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था के वास्तविक प्रभाव पर सवाल और गंभीर हो गए हैं। नियमों का प्रभावी पालन नहीं होने से बाजार में एसिड की उपलब्धता और उसके दुरुपयोग को रोकने की चुनौती बनी हुई है।
केंद्र को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह बाजार में आसानी से उपलब्ध एसिड के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों की सूची के साथ हलफनामा दाखिल करे। अदालत ने एसिड अटैक की बढ़ती और बर्बर घटनाओं पर चिंता जताते हुए प्रभावी कार्रवाई की जरूरत रेखांकित की।
अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट है कि एसिड की बिक्री पर नियंत्रण के लिए केवल कागजी नियम पर्याप्त नहीं हैं। उनके पालन की निगरानी, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी जरूरी है। अब केंद्र सरकार के हलफनामे और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी।










