Home » अपराध » कोच्चि, केरल: मर्सिडीज हादसे में जज के खिलाफ भी एफआईआर में जोड़ी गई धारा, चार पुलिसकर्मी निलंबित

कोच्चि, केरल: मर्सिडीज हादसे में जज के खिलाफ भी एफआईआर में जोड़ी गई धारा, चार पुलिसकर्मी निलंबित

कोच्चि, केरल: केरल में नाबालिग द्वारा चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से 55 वर्षीय जयबालाकृष्णन की मौत के मामले में पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठने के बाद सरकार ने कार्रवाई की है। मामले में कार के मालिक जज के खिलाफ भी कानूनी प्रावधान जोड़ा गया है, जबकि जांच में लापरवाही के आरोपों के बीच चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया कि मामले की जांच में खामियां रही हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला के निर्देश पर को प्राथमिकी में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए जोड़ी गई। इस प्रावधान के तहत नाबालिग द्वारा वाहन चलाने की स्थिति में उसके अभिभावक या वाहन के मालिक की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब मृतक के परिवार ने पुलिस पर आरोपी पक्ष को अनुचित राहत देने के आरोप लगाए थे।

चार पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई

इस मामले में निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में सर्कल इंस्पेक्टर श्याम कुमार केएस, सब-इंस्पेक्टर विश्वजीत, ग्रेड सब-इंस्पेक्टर मनोज केटी और सिविल पुलिस अधिकारी अरुण जोशी शामिल हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पुलिस जांच की प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच की गई है।

गृह मंत्री ने विधानसभा में कहा कि जांच के दौरान कमियां सामने आई हैं और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के पिता के न्यायिक पद पर होने के कारण उन्हें किसी तरह की विशेष रियायत नहीं दी जाएगी।

मृतक के परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

जयबालाकृष्णन के परिवार का आरोप है कि दुर्घटना के बाद पुलिस ने जज और उनके 17 वर्षीय बेटे के पक्ष में काम किया। परिवार ने दावा किया कि शुरुआती प्राथमिकी में उचित धाराएं नहीं लगाई गईं और आरोपी को रात में ही जमानत दिलाने की जल्दबाजी की गई।

परिवार ने पुलिस थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग भी की है। उनका आरोप है कि थाने में मौजूद अधिकारियों ने आरोपी की मदद की और मोबाइल फोन से तस्वीरें हटवाने में भूमिका निभाई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।

जमानत रद्द कराने के लिए अदालत जाने का निर्देश

गृह मंत्री ने पुलिस को नाबालिग को मिली जमानत रद्द कराने के लिए सत्र न्यायालय का रुख करने का निर्देश दिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अब जांच और अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

इस बीच, एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) पी. विजयन कोच्चि पहुंचे और परिवार की शिकायतों की जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, जमानत मिलने के बाद नाबालिग ने तेज गति से वाहन चलाने से जुड़े वीडियो हटा दिए और अपना इंस्टाग्राम अकाउंट निजी कर लिया।

यह मामला सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस जांच की निष्पक्षता और कानून के समान अनुपालन से जुड़े सवाल भी उठा रहा है। सरकार की कार्रवाई के बाद अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और न्यायालय की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

संबंधित समाचार
E-Paper image 2