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UNSC में भारत की दावेदारी को मिला लिकटेंस्टीन का समर्थन, 2028-29 की सीट के लिए बढ़ी कूटनीतिक ताकत

नई दिल्ली, दिल्ली:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यता को लेकर भारत की कूटनीतिक कोशिशों के बीच लिकटेंस्टीन ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सीट पर भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। इस प्रतिबद्धता की घोषणा लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलियोस की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान जारी संयुक्त वक्तव्य में की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की दावेदारी को समर्थन देने के लिए लिकटेंस्टीन का आभार जताया।

पहलगाम आतंकी हमले की दोनों देशों ने की निंदा

भारत और लिकटेंस्टीन ने आतंकवाद के सभी रूपों, विशेष रूप से सीमापार आतंकवाद और उग्रवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की। संयुक्त वक्तव्य में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी उल्लेख किया गया।

दोनों देशों ने हमले में प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। साथ ही, इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया। आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत को भी रेखांकित किया गया।

आतंकवाद की फंडिंग रोकने पर जोर

संयुक्त वक्तव्य में आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया। भारत और लिकटेंस्टीन ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए देशों के बीच समन्वय और सहयोग आवश्यक है।

इस यात्रा के दौरान सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी को समर्थन मिलना दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। लिकटेंस्टीन का समर्थन भारत के उस प्रयास से जुड़ा है, जिसके तहत वह संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था में अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है।

हालांकि, गैर-स्थायी सीट के लिए अंतिम चयन संयुक्त राष्ट्र की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा। लिकटेंस्टीन का समर्थन भारत के पक्ष में एक कूटनीतिक प्रतिबद्धता है।

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