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ट्रंप-शी मुलाकात से पहले ताइवान पर अमेरिका का सख्त रुख, हथियार बिक्री जारी रखने का संकेत

अमेरिका और चीन के बीच होने वाली अहम कूटनीतिक मुलाकात से पहले ताइवान का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की प्रस्तावित बैठक से पहले वॉशिंगटन ने साफ कर दिया है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।


अमेरिका का स्पष्ट संदेश: नीति जस की तस

अमेरिकी अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका अपने पुराने रुख पर कायम रहेगा। हाल के दिनों में दोनों देशों के नेताओं के बीच इस विषय पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन इससे अमेरिकी नीति में किसी बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। अमेरिका ने यह भी दोहराया कि ताइवान के साथ उसका रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग जारी रहेगा।


हथियार बिक्री पर नहीं लगेगा ब्रेक

ताइवान को हथियार बेचने के मुद्दे पर भी अमेरिका ने अपना रुख स्पष्ट किया है। अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने अपने पहले ही वर्ष में ताइवान को जितने रक्षा सौदों की मंजूरी दी, वह पिछली सरकार के पूरे कार्यकाल से भी अधिक है। इससे साफ है कि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और भविष्य में भी हथियारों की आपूर्ति जारी रखेगा।


ताइवान के रक्षा बजट पर अमेरिका की नजर

हाल ही में ताइवान ने अपने रक्षा खर्च को बढ़ाने के लिए एक अतिरिक्त बजट पारित किया है। इस बजट के तहत बड़े पैमाने पर अमेरिकी सैन्य उपकरणों की खरीद की योजना बनाई गई है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस पर आंशिक असंतोष भी जताया है, क्योंकि उनके अनुसार कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव अभी भी शामिल नहीं किए गए हैं।


चीन की बढ़ती गतिविधियों पर चिंता

अमेरिका में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों ने मिलकर एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें चीन की ओर से ताइवान पर बढ़ते दबाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है। यह कदम दिखाता है कि ताइवान का मुद्दा अमेरिका की आंतरिक राजनीति में भी दोनों दलों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।


कूटनीतिक संतुलन की चुनौती

आगामी ट्रंप-शी बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब ताइवान को लेकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है। एक तरफ अमेरिका ताइवान के समर्थन में खड़ा है, वहीं दूसरी ओर वह चीन के साथ अपने संबंधों को भी संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है।


निष्कर्ष

ताइवान का मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में एक संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। ऐसे में ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात से पहले अमेरिका का यह स्पष्ट संदेश आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।

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