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चित्तौड़गढ़ में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: 101 मामलों से जुड़ा म्यूल अकाउंट पकड़ाया

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने कई राज्यों की पुलिस को एक ही धागे में जोड़ दिया। यहां एक ऐसा बैंक खाता पकड़ा गया है, जो देशभर में फैले 100 से अधिक साइबर ठगी मामलों से जुड़ा हुआ था। पुलिस की कार्रवाई में दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है।


क्या है पूरा मामला?

जांच के दौरान सामने आया कि “सोलफेव ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से एक बैंक खाता संचालित किया जा रहा था, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इकट्ठा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। इस तरह के खातों को आमतौर पर “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिनका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के पैसों को छिपाने के लिए किया जाता है।


कई राज्यों से जुड़े थे मामले

इस खाते के तार मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान समेत कई राज्यों में दर्ज 101 साइबर ठगी मामलों से जुड़े पाए गए। अलग-अलग शहरों में चल रही जांच जब आगे बढ़ी, तो सभी सुराग चित्तौड़गढ़ के इसी खाते तक पहुंचे। इससे साफ हो गया कि यह खाता बड़े स्तर पर संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा था।


करीब एक करोड़ रुपये का लेनदेन

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि अगस्त 2025 के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में ठगी की गई रकम इस खाते में जमा की गई थी। इसके बाद पैसों को तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि उनका पता लगाना मुश्किल हो जाए। पुलिस के अनुसार, इस खाते से लगभग एक करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।


दो आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में खाताधारक गोपाल जाट और नारायण वैष्णव को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।


जांच जारी, बड़े गिरोह का शक

पुलिस का मानना है कि यह मामला किसी बड़े साइबर गिरोह से जुड़ा हो सकता है, जो देशभर में ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।


निष्कर्ष

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराध कितनी तेजी से फैल रहा है और किस तरह अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सतर्क रहना और डिजिटल लेनदेन में सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

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