नोएडा, उत्तर प्रदेश। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों की जिंदगी पहले से अधिक व्यस्त हो गई है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ईमेल और लगातार आने वाले संदेशों ने लोगों का ध्यान लंबे समय तक एक जगह टिकाए रखना मुश्किल बना दिया है। कई लोग थोड़ी देर खाली बैठने पर भी मोबाइल देखने लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, हर समय खुद को व्यस्त रखना दिमाग के लिए जरूरी नहीं है। कभी-कभी बोर होना और बिना किसी गतिविधि के शांत बैठना भी मस्तिष्क को आराम देने का एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है।
नोएडा के फोर्टिस अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नेहा पंडिता ने बताया कि बेहतर मानसिक कार्यक्षमता के लिए दिमाग को समय-समय पर आराम देना आवश्यक है। लगातार संदेशों, ईमेल और सोशल मीडिया के बीच ध्यान बदलते रहने से मस्तिष्क पर दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में दिमाग को अपने विचारों और अनुभवों को समझने तथा व्यवस्थित करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
बोरियत के दौरान सक्रिय रहता है डिफॉल्ट मोड नेटवर्क
विशेषज्ञों के अनुसार, जब व्यक्ति किसी काम में व्यस्त नहीं होता या अकेले शांत बैठा होता है, तब भी उसका दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता। इस दौरान मस्तिष्क में डिफॉल्ट मोड नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
यह नेटवर्क स्मृति, आत्मचिंतन और भविष्य के बारे में सोचने जैसी मानसिक प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है। खाली समय में मस्तिष्क पुराने अनुभवों को समझने, विचारों को व्यवस्थित करने और नए विचार विकसित करने में भूमिका निभाता है।
डॉ. नेहा पंडिता ने बोरियत और मानसिक थकावट के बीच अंतर समझने की जरूरत बताई है। उनके अनुसार, बोरियत तब महसूस होती है जब कोई गतिविधि व्यक्ति को संतुष्टि नहीं देती, जबकि मानसिक थकावट लंबे समय तक लगातार काम करने या ध्यान केंद्रित करने के कारण होती है। दोनों स्थितियों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
मोबाइल से दूरी बनाकर दें दिमाग को आराम
विशेषज्ञों के अनुसार, दिमाग को आराम देने के लिए स्मार्टफोन का पूरी तरह इस्तेमाल बंद करना जरूरी नहीं है। इसके बजाय डिजिटल गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना अधिक महत्वपूर्ण है।
खाली समय में तुरंत मोबाइल देखने की आदत छोड़ना एक अच्छा कदम हो सकता है। काम करते समय बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना चाहिए। कंप्यूटर पर काम खत्म करने के तुरंत बाद मोबाइल पर जाने के बजाय कुछ समय स्क्रीन से दूर रहना उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा बिना हेडफोन के टहलना, भोजन के समय मोबाइल का इस्तेमाल कम करना और बातचीत के दौरान सामने वाले पर पूरा ध्यान देना भी अच्छी आदतें हैं। रात में सोने से पहले लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करने से बचना चाहिए।
मानसिक ताजगी बनाए रखने में मिलेगी मदद
डॉ. नेहा पंडिता की सलाह है कि बोरियत महसूस होने पर हर बार खुद को किसी गतिविधि में व्यस्त करने की जरूरत नहीं है। कुछ समय शांत बैठना और अपने विचारों को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने देना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की आदतें दिमाग को आराम देने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। इसलिए बोरियत को हमेशा समय की बर्बादी नहीं समझना चाहिए। कभी-कभी यही खाली समय मानसिक ताजगी के लिए जरूरी साबित हो सकता है।












