नई दिल्ली, दिल्ली। कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार के प्रभाव और नेतृत्व को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक हालिया इंटरव्यू में पार्टी के नेतृत्व और भाई-भतीजावाद से जुड़े सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के गांधी परिवार के नेतृत्व से बाहर नहीं निकल पाने के सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया।
इंटरव्यू में सोनिया गांधी से पूछा गया कि कांग्रेस पार्टी आखिर गांधी परिवार के नेतृत्व के दायरे से बाहर क्यों नहीं निकल पा रही है। इस पर उन्होंने कहा कि यह सवाल कांग्रेस पार्टी से पूछा जाना चाहिए। उनके इस जवाब को पार्टी के नेतृत्व से जुड़े सवाल पर सीधी टिप्पणी से बचने के रूप में देखा जा रहा है।
नेपोटिज्म के आरोपों पर नहीं दिया स्पष्ट जवाब
कांग्रेस में गांधी परिवार की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों की ओर से अक्सर भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए जाते रहे हैं। इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी से भी इस मुद्दे पर सवाल किया गया। हालांकि, उन्होंने आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और इस विषय पर सीधे तौर पर अपनी बात रखने से परहेज किया।
आत्मकथा के संपादित अंश के बीच आया इंटरव्यू
ब्रिटिश अखबार को दिया गया सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू ऐसे समय सामने आया है, जब उनकी आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ का एक संपादित अंश भी जारी होने वाला है। इस कारण इंटरव्यू में उठाए गए राजनीतिक और व्यक्तिगत सवाल चर्चा में हैं।
आपातकाल और यूपीए सरकार पर भी हुई बात
इंटरव्यू में वर्ष 1975 के आपातकाल का मुद्दा भी उठाया गया। सोनिया गांधी ने आपातकाल को इंदिरा गांधी की गलती बताया। वहीं, यूपीए सरकार के कार्यकाल में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के संदर्भ में उन्होंने मंत्रियों के इस्तीफे का जिक्र किया।
इस तरह इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कांग्रेस के नेतृत्व, आपातकाल और यूपीए सरकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी, लेकिन गांधी परिवार के प्रभाव और नेपोटिज्म के आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।












