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62 साल पुराने IDBI बैंक के निजीकरण पर विवाद, 52,878 करोड़ की हिस्सेदारी बिक्री के खिलाफ 10 हजार कर्मचारी करेंगे हड़ताल

नई दिल्ली, दिल्ली। देश के प्रमुख बैंकों में शामिल आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। बैंक के 10,000 से अधिक कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। यह हड़ताल केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम की हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बुलाई गई है। कर्मचारी संगठन ने सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की है।

 

यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने हड़ताल का आह्वान किया है। संगठन बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है और ऐसी परिस्थिति में निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

52,878 करोड़ रुपये में प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री

आईडीबीआई बैंक में कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। इस प्रस्तावित सौदे की कुल कीमत 52,878 करोड़ रुपये बताई गई है।

सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा है। दोनों की हिस्सेदारी मिलाकर कुल 60.72 प्रतिशत होती है।

फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स का नेतृत्व भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स करते हैं। प्रस्तावित सौदे के बाद बैंक की स्वामित्व संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव होगा।

कर्मचारी संगठन ने उठाए निजीकरण पर सवाल

बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने निजीकरण का विरोध करते हुए सरकार से अपनी योजना वापस लेने की मांग की है।

संगठन का कहना है कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है। इसलिए बैंक को मौजूदा व्यवस्था के तहत जारी रखा जाना चाहिए। कर्मचारी निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए दो दिनों की हड़ताल का सहारा ले रहे हैं।

दो दिन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

हड़ताल के चलते 2 और 3 नवंबर को आईडीबीआई बैंक की शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है। शाखाओं में नकद लेनदेन, चेक से संबंधित काम और अन्य ग्राहक सेवाओं में देरी की आशंका है।

हालांकि, बैंकिंग सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह हड़ताल में कर्मचारियों की वास्तविक भागीदारी पर निर्भर करेगा। ग्राहकों के लिए जरूरी होगा कि वे शाखा से संबंधित कामकाज की स्थिति की जानकारी लेकर ही बैंक जाएं।

सरकार के अगले कदम पर नजर

आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का मामला अब कर्मचारी संगठनों के विरोध के कारण चर्चा में है। एक ओर प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठन बैंक की वित्तीय स्थिति का हवाला देकर निजीकरण वापस लेने की मांग कर रहा है।

दो दिवसीय हड़ताल के आह्वान के बाद अब सरकार, बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।

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