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हरियाणा में 2.38 लाख इंतकाल पेंडिंग, रजिस्ट्री के बाद भी रिकॉर्ड में नहीं बन रहे असली मालिक; पोर्टल से बढ़ी परेशानी

चंडीगढ़, हरियाणा

हरियाणा में जमीन की रजिस्ट्री के बाद इंतकाल दर्ज कराने की ऑनलाइन व्यवस्था तकनीकी खामियों के कारण बड़ी परेशानी बनती जा रही है। प्रदेश के राजस्व पोर्टल पर 2,38,688 इंतकाल लंबित बताए जा रहे हैं। कई मामलों में रजिस्ट्री पूरी होने के बावजूद रिकॉर्ड में जमीन का नया मालिक दर्ज नहीं हो पा रहा। कहीं रकबा गलत दिखाई दे रहा है तो कहीं इंतकाल की प्रिंट कॉपी खाली आने या पुराने रिकॉर्ड वापस होने की शिकायत सामने आई है।

लोगों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर से बचाने के लिए सरकार ने ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत जमीन की रजिस्ट्री के 11वें दिन इंतकाल स्वत: दर्ज होना था। लेकिन पोर्टल और सॉफ्टवेयर में आ रही तकनीकी समस्याओं के चलते यह व्यवस्था अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर पा रही है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2,07,560 इंतकाल पटवारियों के स्तर पर लंबित हैं। इसके अलावा 10,537 इंतकाल कानूनगो के स्तर पर लंबित बताए गए हैं। पटवारियों का कहना है कि कई मामलों में उनकी ओर से इंतकाल मंजूर किए जाने के बावजूद पोर्टल पर रिकॉर्ड लंबित दिखाई देता है।

पट्टी अफगान निवासी महेंद्र ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसकी जमीन की रजिस्ट्री करीब दो महीने पहले हो चुकी है, लेकिन अब तक इंतकाल दर्ज नहीं हो पाया। उनके मुताबिक सॉफ्टवेयर में जमीन का रकबा गलत उठ रहा है। उन्होंने बताया कि एक दिन पोर्टल पूरी तरह नहीं चला और अगले दिन पोर्टल चलने के बावजूद गलत रकबा दिखने के कारण इंतकाल की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

पट्टी निवासी वीरभान चौधरी ने बताया कि उन्होंने अपनी मां के नाम एक एकड़ जमीन खरीदी थी। लेकिन इंतकाल में पौना एकड़ जमीन दिखाई जा रही है। उनका कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए वह करीब एक महीने से पटवारखाने के चक्कर लगा रहे हैं।

दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र खटकड़ ने कहा कि सॉफ्टवेयर में अभी भी कुछ खामियां मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि पुराने इंतकाल वापस आने और रकबा गलत दिखने की समस्या विशेष रूप से सामने आ रही है।

जमीन मालिकों की शिकायत है कि कई इंतकालों की प्रिंट कॉपी निकालने पर वह खाली दिखाई देती है। कुछ मामलों में जमीन के रिकॉर्ड से वास्तविक मालिकों के नाम गायब होने की बात भी सामने आई है। कर्मचारियों के अनुसार नए सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड अधूरा मिलने की समस्या भी बनी हुई है। कई पेज के रिकॉर्ड की कमांड देने पर भी केवल कुछ पेज का रिकॉर्ड मिलने की शिकायत है।

जिलावार स्थिति देखें तो सोनीपत में 17,486, अंबाला में 14,486, भिवानी में 10,879, चरखी दादरी में 5,215, फरीदाबाद में 13,786, फतेहाबाद में 7,663, गुरुग्राम में 12,603, हांसी में 5,837, हिसार में 8,484, झज्जर में 12,528, जींद में 13,856, कैथल में 10,255 और करनाल में 9,397 इंतकाल लंबित हैं।

इसी तरह कुरुक्षेत्र में 10,461, महेंद्रगढ़ में 6,826, नूंह में 9,196, पलवल में 13,000, पंचकूला में 4,225, पानीपत में 14,486, रेवाड़ी में 12,510, रोहतक में 7,825 और सिरसा में 9,574 इंतकाल लंबित बताए गए हैं।

राजस्व पोर्टल की तकनीकी खामियों का असर केवल जमीन मालिकों तक सीमित नहीं है। पटवारी और कानूनगो भी सॉफ्टवेयर की समस्याओं के कारण काम प्रभावित होने की बात कह रहे हैं। रजिस्ट्री के बाद समय पर इंतकाल दर्ज नहीं होने से लोगों को जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े दूसरे कामों में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

लोगों की मांग है कि राजस्व विभाग पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करे। साथ ही लंबित इंतकालों को जल्द निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि रजिस्ट्री के बाद जमीन के रिकॉर्ड में मालिकाना हक समय पर दर्ज हो सके।

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