नई दिल्ली: पिछले चार दशकों में भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत किया है। वर्ष 1982 में शुरू किए गए एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के बाद देश ने मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। आज भारत के पास ऐसी आधुनिक मिसाइलों का व्यापक भंडार है, जो परमाणु प्रतिरोध से लेकर सटीक पारंपरिक हमलों और अंतरिक्ष सुरक्षा तक कई रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।
भारत की प्रमुख मिसाइलों में अग्नि, प्रलय और ब्रह्मोस का विशेष स्थान है। अग्नि श्रृंखला की बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी तक परमाणु और पारंपरिक हथियार ले जाने के लिए विकसित किया गया है। यह भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता का अहम आधार मानी जाती है और किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब देने में सक्षम है।
वहीं प्रलय मिसाइल कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली आधुनिक सामरिक मिसाइल है। इसे युद्ध के दौरान दुश्मन के सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर, एयरबेस और अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर अत्यधिक सटीकता के साथ हमला करने के लिए तैयार किया गया है। इसकी तेज गति और उच्च सटीकता इसे भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण हथियार बनाती है।
दूसरी ओर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुनिया की सबसे तेज परिचालन क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसे भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है। यह मिसाइल जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमानों से दागी जा सकती है तथा कम समय में अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखती है।
हाल के वर्षों में विभिन्न मिसाइल परीक्षणों और सैन्य अभ्यासों के दौरान भारत ने इन प्रणालियों की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक मिसाइल प्रणाली न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और संभावित खतरों के खिलाफ प्रभावी प्रतिरोध स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।











