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नई दिल्ली, दिल्ली: खरगे की टिप्पणी पर सर्वेक्षण में 68% लोगों ने जताई नाराजगी, प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचने की बात कही

नई दिल्ली, दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर एक सर्वेक्षण में लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, 68 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि खरगे की टिप्पणी से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। वहीं, 54 प्रतिशत लोगों ने इसे कांग्रेस की हताशा और वैचारिक कमजोरी का संकेत बताया। इसके अलावा, 72 प्रतिशत प्रतिभागियों ने टिप्पणी को सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों के प्रति सम्मान की कमी से जोड़कर देखा।

 

यह सर्वेक्षण मैट्रिज न्यूज कम्युनिकेशंस नामक एजेंसी की ओर से कराया गया। एजेंसी के मुताबिक, इसमें कुल 5,000 लोगों को शामिल किया गया था। सर्वेक्षण 25 से 27 अक्टूबर के बीच कंप्यूटर आधारित टेलीफोन साक्षात्कार यानी सीएटीआई पद्धति से किया गया।

68 प्रतिशत लोगों ने जताई असहमति

सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष के अनुसार, 68 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं थी। यह आंकड़ा राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाओं को सामने रखता है।

प्रधानमंत्री का पद देश की संवैधानिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में इस पद पर बैठे व्यक्ति के संबंध में राजनीतिक नेताओं की टिप्पणियां अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती हैं। हालांकि, सर्वेक्षण में सामने आए आंकड़े प्रतिभागियों की राय को दर्शाते हैं और इन्हें पूरे देश की जनता की सर्वसम्मत राय नहीं माना जा सकता।

54 प्रतिशत ने कांग्रेस की हताशा से जोड़ा

एजेंसी के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 54 प्रतिशत लोगों ने खरगे की टिप्पणी को कांग्रेस की हताशा और वैचारिक कमजोरी का संकेत माना। यह निष्कर्ष कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और उसके नेताओं के बयानों को लेकर प्रतिभागियों के नजरिये को दर्शाता है।

हालांकि, किसी राजनीतिक दल की स्थिति या विचारधारा का आकलन केवल एक बयान अथवा सर्वेक्षण के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए पार्टी की नीतियों, राजनीतिक गतिविधियों और व्यापक जनसमर्थन जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

72 प्रतिशत ने सनातन संस्कृति से जोड़ा मुद्दा

सर्वेक्षण का एक अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि 72 प्रतिशत प्रतिभागियों ने खरगे की टिप्पणी को सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों के प्रति सम्मान की कमी के रूप में देखा। इस प्रतिक्रिया से पता चलता है कि राजनीतिक नेताओं के बयान सांस्कृतिक और वैचारिक बहस को भी प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में खरगे की टिप्पणी का पूरा संदर्भ और सर्वेक्षण की विस्तृत पद्धतिगत जानकारी शामिल नहीं है। इसलिए इन आंकड़ों को संबंधित एजेंसी के निष्कर्षों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सर्वेक्षण के नतीजे राजनीतिक बहस में एक पक्ष का नजरिया सामने रखते हैं, लेकिन उनसे सभी मतदाताओं की सोच का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

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