वॉशिंगटन, अमेरिका। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन ने एक बार फिर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में ईरान पर परमाणु हमला करने का आदेश देने के करीब हो सकते हैं। कार्लसन ने वॉशिंगटन डीसी में कथित तौर पर चल रही ‘न्यूक्लियर क्लॉक’ का जिक्र करते हुए परमाणु संघर्ष की आशंका जताई है। हालांकि, उनके दावों की किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।
फॉक्स न्यूज के पूर्व होस्ट टकर कार्लसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने एक कथित जानकार व्यक्ति के हवाले से दावा किया कि नेतन्याहू इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को रोजाना फोन कर रहे हैं। कार्लसन के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री चाहते हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई करे।
नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति को लेकर किया दावा
कार्लसन ने अपनी पोस्ट में इजरायल की आंतरिक राजनीतिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले सप्ताह आए चुनाव परिणामों के बाद नेतन्याहू राजनीतिक दबाव में हैं और उन्हें सरकार बनाने के लिए ट्रंप के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
कार्लसन का कहना है कि इसी राजनीतिक परिस्थिति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, नेतन्याहू की ओर से इस तरह का दबाव बनाए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ईरान की नतान्ज परमाणु सुविधा का किया जिक्र
टकर कार्लसन ने ईरान की नतान्ज परमाणु सुविधा के पास स्थित पिकएक्स माउंटेन के एक बेहद सुरक्षित भूमिगत परिसर का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस परिसर को संभावित सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में अपनी चिंता से जोड़ा।
उनकी टिप्पणी में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य सहयोग को लेकर भी आशंकाएं दिखाई दीं। हालांकि, किसी संभावित परमाणु हमले की आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है।
परमाणु संघर्ष को लेकर जताई चिंता
कार्लसन ने अपनी चेतावनी में संभावित परमाणु युद्ध के व्यापक परिणामों की ओर ध्यान दिलाया। उनके बयान के बाद अमेरिका की ईरान नीति और मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर चर्चा बढ़ी है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ किसी परमाणु कार्रवाई पर विचार कर रहा है या नहीं। कार्लसन के दावों को किसी प्रमाणित सरकारी जानकारी के बजाय उनकी ओर से जताई गई आशंका के रूप में देखना जरूरी है।












