उज्जैन, मध्य प्रदेश। उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के समापन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि उनके भरोसे ही भारत में रामराज का सपना साकार होगा। उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास, स्पष्ट लक्ष्य और कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करने की क्षमता विकसित करने की अपील की।
सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा आयोजित युवा धर्म संसद के समापन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से बड़ी सेना की मांग नहीं की थी। उन्होंने केवल श्रीराम और लक्ष्मण जैसे दो युवाओं पर भरोसा किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी भारत वही देश है, जहां युवाओं पर ऋषि-मुनियों का भरोसा रहा है। उन्होंने कहा कि जब देश का युवा धर्म संसद जैसे मंच पर बैठता है तो गर्व की अनुभूति होती है।
सफलता के लिए आत्मविश्वास जरूरी
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सफलता पाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि जीवन में चुनौतियां और परेशानियां आएंगी, लेकिन यही परिस्थितियां व्यक्ति को सफलता के लिए तैयार करती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि युवा के पास अदम्य आत्मविश्वास और स्पष्ट लक्ष्य हो तो संसाधनों की कमी उसके रास्ते में बड़ी बाधा नहीं बन सकती। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास के बल पर इतिहास रचा जा सकता है।
21वीं सदी भारत की बनाने का संदेश
मुख्यमंत्री ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि भारत की प्रगति में युवा शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का इस्तेमाल देशहित में करने की अपील की।
डॉ. यादव ने 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए युवाओं से सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा अपने स्पष्ट लक्ष्य और मजबूत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे तो भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।
2027 में द्वारका में होगी अगली युवा धर्म संसद
तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दौरान धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। समापन समारोह में अगले आयोजन की भी घोषणा की गई।
अगली युवा धर्म संसद 2027 में द्वारका में आयोजित होगी। आयोजकों और प्रतिभागियों ने इसे युवाओं को धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।











