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राहुल गांधी को हाई कोर्ट से झटका, ‘चोरों का सरदार’ टिप्पणी मामले में समन रद्द करने से इनकार

मुंबई, महाराष्ट्र

मुंबई। बांबे हाई कोर्ट ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ा झटका देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि 2019 में गिरगांव मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए आदेश में ऐसी कोई कानूनी खामी या गैरकानूनी कार्रवाई नजर नहीं आती, जिसके आधार पर हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़े।

न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 28 अगस्त 2019 को मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत पर आगे की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था।

यह मामला 2018 में राजस्थान में एक जनसभा के दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित ‘चोरों का सरदार’ टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता एमएच श्रीश्रीमल ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। श्रीश्रीमल ने खुद को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता बताया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-थीफ’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था।

राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता सुदीप पसबोला और कुशल मोर ने अदालत में दलील दी कि शिकायत निराधार है और शिकायतकर्ता के पास इसे दायर करने का आवश्यक कानूनी अधिकार नहीं था। उनकी ओर से अदालत से समन और मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।

वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति बोरकर ने कहा कि अदालत को संबंधित आदेश में कोई खामी नहीं मिली। इसलिए राहुल गांधी की याचिका खारिज की जाती है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने 2021 में दिए गए अपने उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टालने का निर्देश दिया गया था। इसका उद्देश्य राहुल गांधी को हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का अवसर देना था।

इस फैसले के बाद मानहानि मामले में राहुल गांधी को तत्काल राहत नहीं मिली है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में अपील का विकल्प उनके लिए खुला है। मामले की आगे की कानूनी दिशा अब शीर्ष अदालत में होने वाली संभावित कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

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