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टीएमसी संकट गहराया: चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के नाम और चुनाव चिह्न पर लगाई रोक

कोलकाता, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़ा विवाद अब चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद और गंभीर हो गया है। आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले आयोग ने टीएमसी से जुड़े दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। आयोग के इस निर्णय के बाद कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है।

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि आयोग का यह कदम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को कमजोर करने की कोशिश है। वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘लेट नाइट बर्थडे गिफ्ट’ बताया।

जुलाई में दोनों गुटों ने किया था दावा

टीएमसी के भीतर पार्टी पर नियंत्रण को लेकर विवाद जुलाई में सामने आया था। उस दौरान पार्टी से जुड़े दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने संगठन पर अपना नियंत्रण होने का दावा किया। इसके बाद पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति विवादित हो गई और मामला चुनाव आयोग के समक्ष पहुंचा।

आयोग ने मामले में अंतरिम फैसला लेते हुए दोनों गुटों को टीएमसी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह फैसला आगामी विधानसभा उपचुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनावी मैदान में उतरने वाले किसी भी संगठन के लिए उसकी आधिकारिक पहचान और चुनाव चिह्न अहम भूमिका निभाते हैं।

उपचुनाव से पहले चुनौती

चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद दोनों गुटों के सामने अपनी चुनावी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक के कारण चुनाव प्रचार और मतदाताओं के बीच राजनीतिक पहचान से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

हालांकि, आयोग का मौजूदा फैसला अंतरिम है। इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम स्थिति आगे की प्रक्रिया और आयोग के अगले निर्णय पर निर्भर करेगी।

कांग्रेस ने साधा निशाना

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि इस फैसले से ममता बनर्जी के गुट को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर राजनीतिक टिप्पणी की।

कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों को राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश फिलहाल दोनों गुटों पर लागू है।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में आगे की चुनावी और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। दोनों गुटों की ओर से पार्टी पर नियंत्रण के दावे, संगठनात्मक स्थिति और चुनावी पहचान से जुड़े मुद्दों पर आगे की कार्रवाई का इंतजार रहेगा।

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न विवाद राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश ने दोनों गुटों की चुनावी तैयारियों को प्रभावित किया है। आने वाले दिनों में आयोग की अगली कार्रवाई और दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया से इस विवाद की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

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